टीवी की मशहूर अभिनेत्री नेहा मारदा ने लंबे समय बाद टीवी पर वापसी की है। धारावाहिक 'क्यों रिश्ता में कट्टी बट्टी' में नेहा एक मां के किरदार में नजर आने जा रही हैं। नेहा को निजी जीवन में मां बनने का तो कोई अनुभव नहीं है लेकिन हां, बीवी वह नंबर वन बनकर दिखा चुकी हैं। यही नहीं, ‘अमर उजाला’ से इस खास बातचीत में नेहा कहती हैं कि उन्हें उनके पति आयुष्मान से शादी के नौ साल बाद फिर से प्यार हो गया है। और, यह सब हो सका लॉकडाउन की वजह से। उनके एक खास मुलाकात
Neha Marda Interview: कोरोना काल की यादों पर बोली नेहा मारदा, शादी के नौ साल बाद हुआ ये नया एहसास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारावाहिक 'क्यों रिश्ता में कट्टी बट्टी' में आपके सामने किस तरह की चुनौतियां आईं?
सबसे बड़ी चुनौती तो बच्चों के साथ काम करना है। उन्हें संभालना है। बच्चे बहुत ही मनमौजी होते हैं। आप उन्हें किसी प्रकार के नियमों में नहीं बांध सकते। चाहे वह आपके खुद के बच्चे ही क्यों न हों! इस कोरोना काल में लोगों के साथ काम करना भी बहुत बड़ी चुनौती है। तीसरी चुनौती यह है कि इस शो का मेरा किरदार शुभ्रा की सोच मुझसे बिल्कुल नहीं मिलती। उसके जीवन की परिस्थितियां मुझसे बिल्कुल मेल नहीं करती। उसके दो बच्चे हैं। उसके पति से उसकी नोकझोंक और लड़ाई होती रहती हैं। वह एक रूढ़िवादी सोच वाले परिवार का हिस्सा है। यह सब मैंने न तो कभी देखा है और न ही कभी झेला है। तो, एक कलाकार के रूप में मुझे उस तरह से मानसिक तौर पर तैयार होने की बहुत जरूरत थी।
असली जिंदगी में माता पिता की लड़ाइयां बच्चों पर किस तरह के प्रभाव डाल सकती हैं?
बच्चे अवसाद में आ सकते हैं! वह आत्महत्या करने के बारे में सोच सकते हैं! उनकी भाषा बदल सकती है! रहन-सहन पर भी फर्क पड़ सकता है! माता पिता की लड़ाइयां बच्चों पर बहुत गहरा असर डाल सकती हैं। दरअसल, बच्चे माता पिता का एक अंग होते हैं। वह अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने माता-पिता से ही प्राप्त करते हैं। अगर आप देर रात तक बाहर रहते हैं लेकिन ऐसा करने से आप अपने बच्चे को रोकते हैं तो कहीं न कहीं आप खुद को ही गलत ठहराते हैं। जब आप योजना बनाएं कि अब आपको माता पिता बन जाना चाहिए। तो, आपको यह भी फैसला कर लेना चाहिए कि अब हमें अपने जीवन जीने के तरीके में बदलाव करने होंगे। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा शराब न पिए तो उसकी शुरुआत आपको खुद से ही करनी होगी।
आप बच्चों को एक्टिंग, डांसिंग और सिंगिंग की शिक्षा देती हैं। एकेडमी के लिए समय कैसे निकालती हैं?
एकेडमी में तमाम काबिल लोग हैं जो बच्चों को यह सब सिखाते हैं। मेरी हमेशा से प्राथमिकता रही है कि मैं भी उन बच्चों को ज्यादा से ज्यादा सिखाऊं। लेकिन, मैं यहां मुंबई में काम करती हूं इस वजह से मेरा हर समय वहां रहना मुमकिन नहीं है। क्योंकि, इस समय कोरोना काल चल रहा है इसलिए एकेडमी खोलने की अनुमति नहीं है। तो, हम बच्चों को ऑनलाइन ही शिक्षा दे रहे हैं। मैं अक्सर अपने कामों में से समय निकालकर बच्चों को सिखाती हूं।
क्या ओटीटी का असर टीवी पर भी दिखता है?
टीवी के कलाकारों पर ओटीटी का असर बहुत है। हर एक कलाकार की भूख रहती है कि वह कुछ ऐसे मुद्दों पर काम करे जो जमीन से जुड़े हों। जिसमें वास्तविकता दिखाई जाए। ओटीटी पर हम कुछ ऐसी ही सामग्री तलाशने की कोशिश करते हैं जिससे लोग अपने आपको जोड़ कर देख सकें। ज्यादा बनावटी किरदार लोगों को पसंद नहीं आते। जो कलाकार टीवी में काम करते हैं उनको यह भूख रहती है कि वह ओटीटी पर काम करके कुछ ऐसा करें जिससे ज्यादा सराहना मिले और काम पुख्ता भी हो। मेरे हिसाब से तो टीवी का काम भी उतना ही पुख्ता है जितना ओटीटी का।