फिल्म ‘ए वेडनेसडे’ के लिए नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले नीरज पांडे इन दिनों खूब प्रयोग कर रहे हैं। नीरज हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में भी शामिल रहे जिनकी फिल्में लोगों ने सिर्फ उनके नाम की वजह से देखीं। बहुत ही बेबाक किस्म के फिल्मकार रहे नीरज अपनी फिल्मों की आलोचनाओं से भी कतराते नहीं है। सिनेमाघरों में रिलीज उनकी पिछली फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ फ्लॉप रही, उनकी नई फिल्म ‘सिकंदर का मुकद्दर’ सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई। इन दोनों फिल्मों के बारे में नीरज पांडे से ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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सिकंदर का मुकद्दर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ऐसा कैसे होता है कि कोई फिल्म ट्रेलर में बेहतरीन नजर आती है और लोग उसे देखने के लिए उत्सुक भी हो जाते हैं, कितनी मेहनत से बनाया आपने ‘सिकंदर का मुकद्दर’ का ट्रेलर?
सच ये है कि ये ट्रेलर मैंने एडिट नहीं किया। ये मेरी टीम का काम है। ऋषि नाम के हमारे एक सहकर्मी हैं, जिन्होंने इसे एडिट किया है। आज की तारीख में सारी चीजें फिल्म और दर्शकों के बीच के पहले संवाद पर टिकी होती हैं। ये पहला संवाद ट्रेलर की शक्ल में होता है। ट्रेलर देखकर ही लोग तय करते हैं कि वे सिनेमाघर जाएं या फिल्म के ओटीटी पर आने का इंतजार करें।
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नीरज पांडे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किसी फिल्म को चलाने के लिए उसके निर्देशक के नाम की कितनी स्टार वैल्यू होती है?
किसी फिल्म को चलाने के लिए सिर्फ निर्देशक ही नहीं बल्कि बहुत सारी चीजों का महत्व होता है। निर्देशक की प्रतिष्ठा बस निर्देशकों से उस पहले संवाद के बिंदु तक ही मायने रखती है और उसके बात इसका कोई मतलब नहीं रह जाता।
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नीरज पांडे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब कि आप खुद को स्टार डायरेक्टर नहीं मानते, राह चलते पहचानते नहीं हैं आपको लोग?
नहीं, कभी नहीं ऐसा हुआ कि राह चलते या किसी एयरपोर्ट पर मुझे किसी ने पहचान कर रोक लिया हो। इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि मैं तेज चलता हूं तो लोग पहचान ही नहीं पाते।
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औरों में कहां दम था
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ के तुरंत बाद ‘मुकद्दर का सिकंदर’ रिलीज हुई है, दोनों पर साथ साथ काम चल रहा था?
नहीं ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की यात्रा काफी लंबी रही है। इस पर काफी समय से काम चल रहा था। फिर बीते साल दिसंबर में हमने तय किया कि ये फिल्म बनानी है। मार्च में इसकी शूटिंग पूरी की और अब फिल्म आपके सामने हैं। उस समय ‘औरों में कहां दम था’ की शूटिंग पूरी हो चुकी थी और उसका पोस्ट प्रोडक्शन चल रहा था।