Movie Review: सैटेलाइट शंकर
एक हीरोइन को आत्महत्या के लिए उकसाने के केस में अभियुक्त बनाए गए मशहूर अभिनेता आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली के करियर की दूसरी फिल्म सैटेलाइट शंकर झंझावातों से जूझते एक इंसान की कहानी है। एक तरफ मां का प्यार है और दूसरी तरफ है जन्मभूमि का एहसान। जननी और जन्मभूमि के बीच तने सूत से धागे पर चलता ये किरदार अपने कलाकार की आत्मा में झांकता दिखता है।
टी सीरीज जैसी कंपनी इस फिल्म के साथ अपना नाम छुपाकर अपनी मूल कंपनी सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज लिमिटेड का नाम आगे कर देती है। फिल्म की मार्केटिंग ढंग से नहीं होती है और न ही इसके प्रचार प्रसार मे किसी तरह की ऊर्जा नजर आती है। अदालत में दोषी साबित होने से पहले ही सूरज को इंडस्ट्री के तमाम दिग्गजों ने अछूत मान लिया है। और, शायद इसीलिए सलमान खान को छोड़ किसी भी सितारे ने इस फिल्म को लेकर कोई ट्वीट नहीं किया। सैटेलाइट शंकर परदे पर और हकीकत में दोनों तरह के रिश्तों का सच्चा आईना है।
Satellite Shankar Review: जननी और जन्मभूमि के बीच बंधा नाजुक धागा है सूरज की ये फिल्म
सूरज पंचोली ने चार साल पहले निखिल आडवाणी की फिल्म हीरो से डेब्यू किया। मशहूर डांस मास्टर कमल के बेटे इरफान कमल की नई फिल्म सैटेलाइट शंकर में वह अभिनय की तमाम पायदानें चढ़े हैं। फिल्म में उनका किरदार एक फौजी का है जिसे अपनी मां से मिलने के लिए छुट्टी पाना कारगिल की सीमा पर तैनात सिपाही की ड्यूटी जितना ही मुश्किल है। उसे मां से मिलने का मौका मिलता भी है तो राह में तमाम तरह की दिक्कते हैं। उसमें सरहद की पोस्ट पर पहुंचने का जज्बा भी है लेकिन राह में कश्मीरियों के पत्थर हैं। अपने ही घर में अपनी ही फौज के साथ क्या सुलूक होता है और क्या होना चाहिए, उसे इस फिल्म में समेटने की खूबसूरत कोशिश की गई है। फिल्म सिनेमा का वही पैटर्न अपनाती है जिसमें फिल्म का पहला हिस्सा जानबूझकर हल्का रखा जाता है ताकि अंत तक आते आते फिल्म का संदेश लोगों के दिलो दिमाग पर अपना असर छोड़ जाए।
फिल्म शुक्रवार को रिलीज होनी है। समीक्षकों को ये फिल्म इसके मेकर्स ने बुधवार से ही दिखानी शुरू कर दी, इसी भरोसे पर कि फिल्म अच्छी बनी है। सैटेलाइट शंकर जैसी फिल्में सिनेमाहॉल से निकलने और फिर उस पर दोबारा सोचने के साथ असर करती हैं। ये टू मिनट मैगी नहीं है जिसमें सेहत बने न बने पर भूख मिट जाती है। ये वीगन फूड है, जिसमें स्वाद भले कोई तुरंत महसूस न हो लेकिन पाचन के बाद शरीर को असली फायदा यही पहुंचाता है। सैटेलाइट शंकर उन सब युवाओं को पसंद आएगी जो मां से और अपने वतन की मिट्टी से प्यार करते हैं।
फिल्म सैटेलाइट शंकर की अपनी कमजोर कड़ियां भी हैं। लेकिन, इसमें दोष फिल्म का कम फिल्म के बारे में लोगों तो जानकारी पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों का ज्यादा है। म्यूजिक किसी को पता नहीं कब आया कब गया। फिल्म में देखो तो धुनें जमती हैं। कहानी में उन्हें पिरोया जरूर गलत जगहों पर गया है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक इसकी जान है और उतनी ही जानदार है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग।
जिन मानसिक हालात में सूरज पंचोली ने इस फिल्म की शूटिंग की होगी, उसे देखते हुए उनका अभिनय तारीफ के काबिल है। एक युवा फौजी के किरदार में वह छाप छोड़ जाते हैं और कुछ कुछ याद दिला जाते हैं शाहरुख खान के सीरियल फौजी की। वैसा ही उद्वेग, वैसा ही गुस्सा और वैसा ही प्यार। मेघना आकाश की हिंदी में ये पहली फिल्म है। असरदार रहा उनका भी अभिनय। पलोमी घोष और उपेंद्र लिमये ने अपने अपने किरदारों में छाप छोड़ी है।
फिल्म सैटेलाइट शंकर का मुकाबला बॉक्स ऑफिस पर आयुष्मान खुराना की उस बाला से है जिस पर कम से कम अब तक आधा दर्जन लोग कहानी की चोरी करने का आरोप लगा चुके हैं। इस लिहाज से सैटेलाइट शंकर ओरीजनल भी है और ताजी भी। अमर उजाला मूवी रिव्यू में फिल्म सैटेलाइट शंकर को मिलते हैं पांच में से तीन स्टार।
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