Movie Review: गिल्टी
कलाकार: कियारा आडवाणी, आकांक्षा रंजन, ताहेर शब्बीर, गुरफतेह सिंह पीरजादा, कुणाल विजयकर, मनु ऋषि आदि।
निर्देशक: रुचि नारायण
निर्माता: करण जौहर और अपूर्व मेहता
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: ****
करण जौहर की डिजिटल प्रोडक्शन कंपनी धर्माटिक एंटरटेनमेंट की फिल्म गिल्टी के रिव्यू से पहले एक किस्सा साल 1989 के आखिरी महीने का। इसी महीने अमिताभ बच्चन की एक बेहतरीन फिल्म मैं आजाद हूं रिलीज हुई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चली नहीं। वजह? इससे पहले अमिताभ बच्चन की तीन मेगा बजट फिल्में गंगा जमना सरस्वती, तूफान और जादूगर लाइन से सुपरफ्लॉप हुई थीं। लोग मारे डर के मैं आजाद हूं देखने ही नहीं गए। गिल्टी 6 मार्च को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई। तीन दिन लग गए ये हिम्मत बांधने में कि कहीं ये फिल्म भी तो करण जौहर की ड्राइव, घोस्ट स्टोरीज या फिर व्हाट द लव! की तरह समय की गोची नहीं करेगी। लेकिन, डर गलत निकला। फिल्म जबर्दस्त निकली।
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Guilty
- फोटो : amar ujala
सिनेमाघरों में इस साल रिलीज हुईं तीन बड़ी और बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में छपाक, पंगा और थप्पड़ दर्शकों को सिनेमाघरों तक उम्मीद के मुताबिक खींच नहीं पाईं हैं। बड़े परदे पर पूछ कमाऊ पूत की होती है। कमाऊ पूत माने जो मूल धन सूद समेत वापस ला सके। यहां नेटफ्लिक्स पर ऐसा कोई दबाव नहीं है। गिल्टी इसी मुक्ताकाश की बेहतरीन रचना है। सुधीर मिश्रा की फिल्म हजारों ख्वाहिशें ऐसी दरअसल इसकी लेखक रुचि नारायण की भी फिल्म कही जानी चाहिए। इन्हीं रुचि नारायण का नेटफ्लिक्स पर सिक्सर है, गिल्टी।
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गिल्टी
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म के मुख्य कलाकारों में सबसे सीनियर अगर कियारा आडवाणी हों तो समझ सकते हैं कि बाकी के कलाकारों ने अब तक कितनी सिनेमागिरी की होगी। लेकिन, ये फिल्म रुचि नारायण के साथ साथ नए चेहरों का वैसा ही कमाल है, जैसा कभी एन चंद्रा ने फिल्म अंकुश में किया था। ये फिल्म नए जमाने की मदर इंडिया भी कही जा सकती है, बस यहां कुर्बानी मां नहीं एक दोस्त देती है, कारण दोनों के एक हैं।
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गिल्टी
- फोटो : सोशल मीडिया
रुचि नारायण, कनिका ढिल्लन और अतिका चौहान ने मिलकर जो गिल्टी लिखी है, उसे इसके पूरे असर के साथ परदे पर पेश करने के लिए इसके कलाकारों की जितनी दाद दी जाए कम है। 13 साल की उम्र में अपने साथ जो कुछ हुआ उसे भुलाने के लिए मनोरोगी बना दी गई नानकी अपने बॉयफ्रेंड वीजे पर जान छिड़कती है। वीजे के बैंड के लिए वह बेहतरीन गाने लिखती है और उसके दोस्तों के साथ चिल करती है। वैलेंटाइंस डे की एक रात कॉलेज के हॉस्टल में जो कुछ होता है, उससे नानकी, वीजे और उसके दोस्तों की जिंदगी उथल पुथल हो जाती है। घटना के केंद्र में है झारखंड से दिल्ली पढ़ने आई लड़की, तनु कुमार।
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गिल्टी
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रुचि नारायण की इस फिल्म में जीत इसलिए भी होती है क्योंकि हर किरदार में उनकी कास्टिंग टीम बिल्कुल सही कलाकार फिट करने में कामयाब रही। नानकी के किरदार में कियारा आडवाणी ने कमाल की अदाकारी की है। प्यार जताने में तो खैर कियारा का कोई सानी वैसे भी नहीं है, लेकिन मेट्रो ट्रेन के अकेले डिब्बे में अवसाद से जूझने वाले सीन में वह अपनी अभिनय क्षमता की रेंज दिखाती हैं। वैसे कहानी, कलेवर और क्लाइमेक्स के हिसाब से देखें तो ज्यादा दमदार किरदार अनुष्का रंजन का है। टीवी निर्माता दंपती शशि रंजन और अनु रंजन की छोटी बेटी की ये डेब्यू फिल्म है और पहली फिल्म में ही उन्होने अदाकारी की बड़ी लकीर खींच दी है। फिल्म में इन दोनों के बाद जिस कलाकार ने बेहतरीन काम किया है, वह हैं वकील दानिश अली बेग के किरदार में ताहिर शब्बीर। इनके अलावा गुरफतेह सिंह पीरजादा, कुणाल विजयकर और मनु ऋषि ने भी सहायक भूमिकाओं में काबिले तारीफ काम किया है।