मूवी रिव्यू: भंगडा पा ले
कलाकार: सनी कौशल, रुखसार ढिल्लों, श्रिया पिलगांवकर आदि।
निर्देशक: स्नेहा तौरानी
निर्माता: रॉनी स्क्रूवाला
पिछले साल के दूसरे शुक्रवार को निर्माता रॉनी स्क्रूवाला ने विकी कौशल पर दांव लगाया। फिल्म उरी द सर्जिकल स्ट्राइक उनके लिए जैकपॉट साबित हुई। इस साल के पहले शुक्रवार को भाव विकी के छोटे भाई सनी का खुला है। सनी कौशल की ये तीसरी फिल्म है। अपने भाई की तरह ही वह भी धीरे धीरे जगह बनाने में यकीन रखते हैं लेकिन शायद कहानियों के चयन की नुस्खा उन्हें अपने भाई से अब लेना ही होगा। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बहुत उदार नहीं है और यहां मौके बार-बार नहीं मिलते। फिल्म भंगड़ा पा ले में सनी ने ये एक और मौका गंवाया है।
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Bhangra Paa Le
- फोटो : amar ujala mumbai
हिंदी सिनेमा में नृत्य आधारित फिल्मों की लंबी परंपरा रही है। ज्यादा दूर न जाएं तो मिथुन चक्रवर्ती को डिस्को डांसर ने सुपरस्टार बनाया और गोविंदा को फिल्म इल्जाम ने। उसके बाद इस कैटेगरी में फिट होने की कोशिश वरुण धवन करते रहे हैं और एबीसीडी सीरीज की फिल्मों ने उनके लिए जगह भी बनाई है। लेकिन, एक संपूर्ण डांसिंग स्टार की जगह हिंदी सिनेमा में अब भी खाली है। कभी देश की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी रही टिप्स के मालिक रमेश तौरानी की बेटी स्नेहा ने इसी जगह सनी कौशल को फिट करने की कोशिश की है, दिक्कत बस ये है कि न तो सनी को और न ही स्नेहा को पंजाबियत की खास समझ इस फिल्म में नजर आती है।
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भंगड़ा पा ले
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म भंगड़ा पा ले में दो कहानियां एक साथ चलती हैं। एक कहानी जग्गी सिंह की है जो डांस कंपटीशन जीतने के सपने देख रहा है। दूसरी कहानी कप्तान सिंह के सपनों की है जिसकी रगों में भंगड़ा दौड़ता है। जग्गी का मुकाबला सिमी से है और कप्तान अपने सपनों की रानी निम्मो पर फिदा है। इन दोनों कहानियों का संगम ही फिल्म का चरम बिंदु है लेकिन फिल्म की दोनों कहानियां उससे पहले ही लड़खड़ा जाती हैं। फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है धीरज रतन की लिखी इसकी कथा और पटकथा।
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भंगड़ा पा ले
- फोटो : सोशल मीडिया
नायक और नायिका का मुकाबला रोमांस गढ़ने की पहली सीढ़ी तमाम फिल्मों में रहा है लेकिन इसमें भी दोनों के बीच एक तरह का आकर्षण गढ़ पाना ही ऐसी फिल्मों के निर्देशकों की पहली चुनौती होता है। यहां कप्तान और निम्मो की कहानी में तो रस दिखता है लेकिन जग्गा और सिमी की कहानी बेरंग है। इसके चलते दोनों कहानियों का इंद्रधनुष कई बार बनते बनते रह जाता है। यहां स्नेहा में अनुभव की कमी फिल्म की कमजोर कड़ी बनती है।
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भंगड़ा पा ले
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म की तीसरी सबसे कमजोर कड़ी है इसका संगीत। प्रीतम ने नए कलाकारों के लिए जैम 8 नाम की जो कंपनी बनाई है, भंगड़ा पा ले के ज्यादातर गाने उसी के रचे बुने हैं। लेकिन, ये गाने या बोलियां ही फिल्म की रफ्तार में रोड़ा अटकाने लगती हैं। एक डांस फिल्म का संगीत जैसा होना चाहिए वैसा यहां बन नहीं पाया है। फिल्म लटक लटक कर आगे बढ़ती है, इंटरवल के बाद फिल्म में रफ्तार तो आती है लेकिन तब तक पंजाब की पांचों नदियों का पानी बहुत ज्यादा बह चुका होता है। नृत्य निर्देशन भी फिल्म को कहीं से सहारा देता नहीं दिखता।