फिल्म: पानीपत - द ग्रेट बिट्रेयल
कलाकार: अर्जुन कपूर, कृति सेनन, संजय दत्त, मोहनीश बहल, पद्मिनी कोल्हापुरे, मंत्रा और जीनत अमान आदि।
निर्देशक: आशुतोष गोवारिकर
निर्माता: सुनीता गोवारिकर और रोहित शेलाटकर
सिनेमा में बिरले निर्देशक ही होते हैं जो अपनी सर्वोत्तम फिल्मों से भी बेहतर फिल्में बनाने में कामयाब होते हैं। आमिर खान के साथ शुरू हुआ आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन का सफर शाहरुख खान और ऋतिक रोशन से होता हुआ अर्जुन कपूर तक आ पहुंचा है। चुनौती आशुतोष के लिए इस बार इसलिए सबसे ज्यादा रही क्योंकि अर्जुन कपूर आमिर, शाहरुख या ऋतिक की तरह न तो सुपरस्टार हैं और न ही उनकी गाड़ी अपने करियर के उनवान पर ही है। अर्जुन को इस फिल्म में चिड़िया की आंख दिखाने में आशुतोष ने द्रोणाचार्य की भूमिका निभाई है और अर्जुन भी इस बार लक्ष्य भेदने में सफल रहे।
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'पानीपत' का दूसरा गाना 'मन में शिवा' लॉन्चिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पानीपत – द ग्रेट बिट्रेयल की कहानी उसी कालखंड की है जिसे निर्देशक संजय लीला भंसाली फिल्म बाजीराव मस्तानी में दिखा चुके हैं। चूंकि दोनों फिल्मों का कथानक एक जैसे कालखंड का है सो पहनावा, रहन सहन भी वैसा ही है। लेकिन दोनों फिल्मों की साम्यता बस यहीं तक है। बाजीराव की मस्तानी से मोहब्बत की कहानी पर यहां सदाशिव राव की मिट्टी से मोहब्बत भारी है। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी के भाव लेकर निकला सदाशिव राव हीरो इसीलिए बन पाया है। बाजीराव अपनी पत्नी के जीते जी दूसरी घरवाली लाता है, सदाशिव धरती से प्रेम करने वालों लड़ाकों की घरवालियों की उम्मीद बनता है। वह नाना का करिश्माई कमांडर है। उजगीर के निजाम को वह धूल चटाता है। और, बात जब सबसे खूंखार अब्दाली का खून बहाने की आती है तो वह सबसे आगे सीना तानकर खड़ा मिलता है।
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Panipat
- फोटो : social media
आशुतोष गोवारिकर ने पानीपत के निर्माण के दौरान ज्यादा इसकी बात नहीं की। अर्जुन कपूर ने फिल्म की पूरी शूटिंग के दौरान अपना घुटा हुआ सिर छुपाए ही रखा। आशुतोष अपनी पिछली कुछ फिल्मों जैसे खेले हम जी जान से और मोहेंजो दारो में लीक से अलग जाने के फेर में कुछ ज्यादा ही भटक गए थे। इस बार वह कौतूहल की बजाय करिश्मे की नई लीक बनाने में सफल रहे। लगान, स्वदेस और जोधा अकबर वाला उनके भीतर का निर्देशक फिर से जागा है। कहानी के हर सिरे की गांठ उन्होंने मजबूती से लगाई है। अशोक चक्रधर के संवादों से उन्होंने मदद भी खूब पाई है। तमाम जगहों पर कलाकारों का मराठी में बात करना अखरता भले हो लेकिन बात समझ में आ जाती है। यही आशु के निर्देशन की जीत है।
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Panipat
- फोटो : social mumbai
कलाकारों में ये फिल्म अर्जुन कपूर की है। हिंदी सिनेमा की पूरी एक लॉबी अर्जुन कपूर का मर्सिया पढ़ने को बेताब रही है। लेकिन, अर्जुन ने इस बार सव्यसाची बनकर दिखाया है। उनकी देहयष्टि और हिंदी पर उनकी कमजोर पकड़ कहीं कहीं जाहिर होती भी हो लेकिन आशुतोष ने सिनेमाई रंगों से इन दागों को छुपा लिया है। पार्वती बाई के किरदार में कृति का करिश्मा भी देखने लायक है। जौहरी के हाथों आकर घिसे हीरे सी वह इसी फिल्म में चमकी हैं। संजय दत्त का डील डौल उनकी उम्र की वजह से बाजीराव मस्तानी के रणवीर सिंह जैसा प्रभावी न हो लेकिन जब भी वह आततायी सी आतंक जगाना चाहते हैं, कामयाब रहते हैं।
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'पानीपत' में अर्जुन कपूर
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म पानीपत की कामयाबी इसके तकनीकी कौशल में भी है। स्टीवन बर्नाड ने फिल्म को पतंग की तरह उड़ाया है। पहले सद्दी सी ढील और फिर मांझे वाली चुस्ती। फिल्म का ग्राफ धीरे- धीरे ऊपर ले जाने में सी. के. मुरलीधरन की सिनेमैटोग्राफी और अजय अतुल का संगीत भी सहयोग करता है। मराठी संगीत अजय अतुल की विशेषता रही है। पानीपत में उनके ढोल ताशों का दमखम इसीलिए काम भी करता है। अमर उजाला मूवी रिव्यू में फिल्म पानीपत को मिलते हैं चार स्टार।