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IC 814 The Kandahar Hijack: हंगामा क्यों है बरपा? समझिए नेटफ्लिक्स की 'आईसी 814' पर विवाद का पूरा मामला

Tue, 03 Sep 2024 12:17 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Tue, 03 Sep 2024 12:17 PM IST
सार

‘आईसी 814- द कंधार हाइजैक’ को लेकर जो विवाद हो रहा है वह वेब सीरीज में हाईजैकर्स (अपहर्ताओं) के चित्रण को लेकर है। इस सीरीज में निर्माताओं पर आरोप है कि हाईजैक करने वालों के नाम इस तरह रखे गए हैं कि उनका मूल धर्म छिपाया गया है। अपहर्ताओं के इसी  ‘मानवीय’ चित्रण से विवाद खड़ा हो गया है।

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IC 814 The Kandahar Hijack: controversy on Netflix India Series directed by Anubhav Sinha starrer Vijay Varma
IC 814- The Kandahar Hijack - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेटफ्लिक्स पर 29 अगस्त को वेब सीरीज ‘आईसी 814- द कंधार हाइजैक’ रिलीज हुई। अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित यह सीरीज रिलीज से पहले से ही काफी चर्चा में थी। आखिर इसका विषय ही ऐसा था। 'आईसी 814' वर्ष 1999 की कंधार प्लेन हाईजैक घटना पर आधारित है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हर कोई उस भयावह कहानी को परदे पर देखने के लिए उत्साहित था। लेकिन, जैसे ही सीरीज ओटीटी पर स्ट्रीम होनी शुरू हुई, इस पर विवाद शुरू हो गया। लोगों का गुस्सा भड़कने लगा। सोशल मीडिया पर बायकॉट ट्रेंड चल पड़ा। सरकार ने एक्शन ले लिया और इस सीरीज के सिलसिले में नेटफ्लिक्स के कंटेंट हेड को तलब किया गया है। बताया जा रहा है कि नेटफ्लिक्स के कंटेंट हेड आज मंगलवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव से मुलाकात करेंगे और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। आखिर ऐसा क्या है इस सीरीज में कि हंगामा बरपा है और कंटेंट हेड तक को जवाब देना पड़ रहा है। आइए जानते हैं...

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क्या थी कंधार प्लेन हाईजैक घटना?
‘आईसी 814- द कंधार हाइजैक’ को लेकर जो विवाद हो रहा है वह वेब सीरीज में हाईजैकर्स (अपहर्ताओं) के चित्रण को लेकर है। वेब सीरीज के विवाद को जानने से पहले कंधार प्लेन हाईजैक घटना को समझ लेते हैं।  24 दिसंबर 1999 को नेपाल से दिल्ली के लिए रवाना हुए एक भारतीय विमान को हाइजैक कर लिया गया था और सात दिनों तक यात्रियों को बंधक बनाकर रखा गया। दिल्ली की बजाय विमान सीधे कंधार में रुका। इस घटना से भारत ही नहीं, दुनियाभर में हफ्ते भर तक हलचल मची रही थी। यात्रियों की सुरक्षा के एवज में तब भारत सरकार को भारतीय जेलों से बंद तीन आतंकियों को रिहा करना पड़ा था। ये तीन आंतकीं थे मौलाना मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर। 
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सोशल मीडिया पर बायकॉट ट्रेंड शुरू
काठमांडू से दिल्ली की उड़ान भरने वाले इंडियन एयरलाइन के विमान को एक धर्म विशेष के आतंकियों ने हाईजैक किया था, जो यात्री बनकर जहाज में सवार हुए थे। इस सीरीज में निर्माताओं पर आरोप है कि हाईजैक करने वालों के नाम इस तरह रखे गए हैं कि उनका मूल धर्म छिपाया गया है। अपहर्ताओं के इसी ‘मानवीय’ चित्रण से विवाद खड़ा हो गया है। कई दर्शकों ने इस पर आपत्ति जताई है। ‘बॉयकॉट नेटफ्लिक्स’, ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ के साथ कई ‘एक्स’ यूजर्स ने पोस्ट साझा किए हैं।

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सीरीज में ऐसा क्या दिखाया कि हंगामा हो गया?
दावा किया जा रहा है कि फिल्म निर्माताओं ने एक निश्चित समुदाय से संबंधित आतंकियों को बचाने के लिए अपहरणकर्ताओं के नाम बदलकर ‘शंकर’ और ‘भोला’ कर दिए हैं। इससे दर्शकों की भावनाएं आहत हुई हैं। सोशल मीडिया पर दर्शकों का गुस्सा फूट रहा है। साथ ही केंद्र सरकार भी इसे लेकर सख्त है। सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति को देश की भावनाओं से खेलने का अधिकार नहीं है। सरकार ने कल सोमवार को नेटफ्लिक्स के कंटेंट हेड को तलब किया था और आज उनकी पेशी है।

अमित मालवीय ने क्या कहा?
भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने भी सीरीज पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आईसी-814 के अपहर्ता खूंखार आतंकवादी थे, जिन्होंने अपनी मुस्लिम पहचान बदलने के लिए दूसरे नाम रख रखे थे। मालवीय ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'फिल्मकार अनुभव सिन्हा ने उनके गैर-मुस्लिम नामों को तवज्जो देकर अपनी आपराधिक मंशा को सही ठहरा दिया है। कुछ दशक बाद लोग सोचेंगे कि हिंदुओं ने आईसी-814 का अपहरण किया था।' मालवीय ने कहा कि पाकिस्तानी आतंकवादी मुसलमान थे। सीरीज में उनके अपराधों को छिपाने के वामपंथी एजेंडे ने काम किया। यह सिनेमा की ताकत है, जिसका कम्युनिस्ट 70 के दशक से ही या शायद इससे पहले से ही आक्रामक तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल दीर्घावधि में भारत की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी या सवालों के घेरे में आएगी, बल्कि उन धार्मिक समूहों का दोष हट जाएगा, जो रक्तपात के लिए जिम्मेदार रहे हैं।
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कंगना रनौत ने किया तीखा हमला
इस सीरीज में हाईजैक करने वालों के किरदारों के चित्रण पर कंगना रणौत ने भी निशाना साधा है। कंगना ने अमित मालवीय का पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 'देश का कानून यह है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी परिणाम या सेंसरशिप के ओटीटी प्लेटफार्मों पर अकल्पनीय मात्रा में हिंसा और नग्नता दिखा सकता है। कोई भी व्यक्ति अपने राजनीतिक रूप से प्रेरित भयावह उद्देश्यों के हिसाब से वास्तविक जीवन की घटनाओं को विकृत भी कर सकता है। दुनियाभर में कम्युनिस्टों या वामपंथियों को इस तरह की राष्ट्र विरोधी अभिव्यक्ति के लिए पूरी आजादी है, लेकिन एक राष्ट्रवादी के रूप में कोई भी ओटीटी प्लेटफॉर्म हमें ऐसी फिल्में बनाने की इजाजत नहीं देता, जो भारत की अखंडता और एकता के इर्द-गिर्द घूमती हों। ऐसा लगता है कि सेंसरशिप केवल हममें से कुछ लोगों के लिए है, जो इस देश के टुकड़े नहीं चाहते हैं और ऐतिहासिक तथ्यों पर फिल्में बनाते हैं। यह बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण है'।

इमरजेंसी vs 'आईसी 814'!
सोशल मीडिया पर यूजर्स  इमरजेंसी vs 'आईसी 814' लिखकर पोस्ट साझा कर रहे हैं। दरअसल, कंगना रनौत की आगामी फिल्म 'इमरजेंसी' 6 सितंबर को रिलीज होनी थी। लेकिन, सेंसर बोर्ड ने इसकी रिलीज पर रोक लगा दी है। फिल्म को लेकर विवाद हो रहे हैं। इस पर कंगना रनौत के फैंस नाराज हैं। सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि 'इमरजेंसी' की रिलीज पर रोक लगा दी जाती है और 'आईसी 814' को रिलीज कर दिया जाता है। यह दो भारत हैं।
 


 
 

सीरीज पर रोक के लिए दायर की गई याचिका
सीरीज पर विरोध का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। इस सीरीज पर रोक लगाने के लिए हाल ही में एक जनहित याचिका दायर की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार (3 सितंबर) को एक जनहित याचिका दायर कर इस शो पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि वेब सीरीज में अपहरणकर्ताओं की वास्तविक पहचान के बारे में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने किया गया है। इस याचिका के मुताबिक वेब सीरीज वास्तविक अपहर्ताओं के 'भोला' और 'शंकर' जैसे नाम दिखाए गए हैं, जिससे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यह याचिका हिंदू सेना के अध्यक्ष और किसान सुरजीत सिंह यादव की ओर से दायर की गई है। इसमें में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का प्रमाण पत्र रद्द करने और सीरीज के पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है।


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