फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

'ये फिल्म काल्पनिक घटनाओं पर आधारित है..', जानें क्यों हर फिल्म के पहले आता है डिसक्लेमर

Sat, 16 Nov 2019 06:18 PM IST
Avinash Pal अविनाश सिंह पाल, अमर उजाला
अविनाश सिंह पाल, अमर उजाला Published by: Avinash Pal Updated Sat, 16 Nov 2019 06:18 PM IST
विज्ञापन
Metro Goldwyn Mayer film Rasputin and the Empress is the reason behind Movies disclaimer
फिल्म का डिसक्लेमर - फोटो : सोशल मीडिया

हर शुक्रवार को सिनेमाघर में कोई न कोई फिल्म रिलीज होती है। न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि दर्शकों के पास अब हॉलीवुड और टॉलीवुड का भी विकल्प उपलब्ध रहता है। फिल्म चाहें कोई भी हो, जॉनर चाहें जो भी हो, लेकिन हर फिल्म में एक बात कभी नहीं बदलती और वो है डिसक्लेमर। दरअसल हर फिल्म के पहले आपको एक डिसक्लेमर दिखाया जाता है, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि आखिर वो आपको क्यों दिखाया जाता है और इसकी शुरुआत कब से हुई? इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको बताते हैं डिसक्लेमर का इतिहास।

Metro Goldwyn Mayer film Rasputin and the Empress is the reason behind Movies disclaimer
रसपुतिन - फोटो : सोशल मीडिया

हर फिल्म की शुरुआत से पहले आपको स्क्रीन पर लिखा दिखता है, 'ये फिल्म काल्पनिक घटनाओं पर आधारित है और इसका जीवित और मृत किसी भी शख्स से कोई वास्ता नहीं। अगर किसी की कहानी इससे मिलती है, तो वो बस एक संयोग मात्र है। ( All Characters appearig in this film are fictious. Any resemblance to real persons living or dead, is purely coincidental)दरअसल जिस शख्स की वजह से हर फिल्म के पहले डिसक्लेमर दिया जाता है उसका नाम है ग्रिगोई रसपुतिन (Rasputin)

Metro Goldwyn Mayer film Rasputin and the Empress is the reason behind Movies disclaimer
रसपुतिन - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल रसपुतिन पर बनी फिल्म के बाद ही एक बड़ा विवाद हुआ था और उसके बाद से ही फिल्मों के पहले डिसक्लेमर का सिलसिला शुरू हुआ। लेकिन विवाद से पहले जरा जान लेते हैं कि आखिर कौन है ग्रिगोरी रसपुतिन। रसपुतिन की कहानी शुरू होती है 1869 से, जहां एक किसान के परिवार में जन्म के बाद भी रसपुतिन अपना खानदानी पेशा यानी किसानी नहीं करता, बल्कि एक साधु बनने की राह पर चल देता है। रसपुतिन की जिंदगी में तब बदलाव आना शुरू होता है जब उसकी बेमतलब बातें सच होना शुरू हो जाती है। ऐसे में धीरे-धीरे लोग उसकी हर बात का विश्वास करने लगते और जानें कैसे उसकी बातें सच होने लगतीं और आखिरकार 1906 में ये बात पहुंचती है शाही दरबार तक। उस वक्त तक लोग ऐसा भी कहने लगे थे कि रसपुतिन को सम्मोहन करना आता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Metro Goldwyn Mayer film Rasputin and the Empress is the reason behind Movies disclaimer
रसपुतिन - फोटो : सोशल मीडिया

शाही दरबार में रूस के आखिरी शाही परिवार की रानी एलेक्जेंड्रा अपने बेटे एलेक्सी के इलाज के लिए परेशान थीं, उस वक्त तक जहां- जहां से उन्हें उम्मीद थी, वहां- वहां से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी थी। ऐसे में जब रसपुतिन के बारे में रानी को पता लगता है तो वो तुरंत उसे बुलाती हैं। वहीं रसपुतिन भी रानी को भरोसा देता है कि उनके बेटे को कुछ नहीं होगा। कोई नहीं जानता लेकिन किसी तरह से रानी के बेटे की तबीयत में सुधार होने लगता है और इसके बाद न सिर्फ रानी बल्कि पूरा शाही दरबार रसपुतिन का मुरीद होने लगता है।

विज्ञापन
Metro Goldwyn Mayer film Rasputin and the Empress is the reason behind Movies disclaimer
रसपुतिन - फोटो : सोशल मीडिया
रसपुतिन का जादू शाही परिवार पर कुछ ऐसा चलने लगा कि अब हर बात का फैसला रसपुतिन से पूछने के बाद ही किया जाता। उस वक्त एक तरफ जहां रसपुतिन का हर कोई मुरीद हो रहा था तो वहीं दूसरी ओर रसपुतिन के सनकीपन और सेक्स की भूख के किस्से भी आम होने लगे। वर्ष 1914 तक सब कुछ अपने हिसाब से चलता रहा लेकिन  प्रथम विश्वयुद्ध ने रसपुतिन की जिंदगी पलट दी क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि रूस ने विश्वयुद्ध रसपुतिन के कहने के मुताबिक ही लड़ा था।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed