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Denzil Dias: मीडिया में छपने वाले बॉक्स ऑफिस आंकड़े फर्जी, इसीलिए नहीं हो रहा भारतीय सिनेमा में विदेशी निवेश

Tue, 10 Dec 2024 11:52 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 10 Dec 2024 11:52 PM IST
सार

हॉलीवुड के पांच सबसे बड़े स्टूडियो में शामिल वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की भारतीय शाखा के प्रबंध निदेशक डेंजिल डायस ने हाल ही में भारत के सिनेमा में विदेशी निवेश की मौजूदा स्थिति को लेकर अमर उजाला से खुलकर बात की। 

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Denzil Dias Exclusive Interview with Pankaj Shukla Warner Bros Discovery Sacnilk Comscore Intern Deepika
डेंजिल डायस - फोटो : अमर उजाला

‘जवान’, ‘एनिमल’, ‘पठान’, ‘गदर 2’ और ‘पुष्पा 2’ जैसी एक्शन फिल्में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच कर वापस लाने में सफल तो हो रही हैं लेकिन अब भी, दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाले देश भारत के सिनेमा में विदेशी निवेश न के बराबर है। इसकी बड़ी वजह है भारतीय सिनेमा में पारदर्शिता का अभाव, आंकड़ों की हेराफेरी और झूठ के सहारे कारोबार को चमकाते रहने की फितरत। हॉलीवुड के मेजर्स (पांच सबसे बड़े स्टूडियो) में शामिल वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की भारतीय शाखा के प्रबंध निदेशक डेंजिल डायस से इन्हीं मुद्दों को लेकर ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने ये लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अपनी कंपनी की पहली हिंदी फिल्म ‘इंटर्न’ की शूटिंग के बारे में तो बताया ही, साथ ही ये भी बताया कि देश में तेजी से लोकप्रिय हो रही बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डाटा वेबसाइट सैकनिल्क का काम करने का तरीका क्या है?

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Denzil Dias Exclusive Interview with Pankaj Shukla Warner Bros Discovery Sacnilk Comscore Intern Deepika
डेडपूल एंड वूल्वरिन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्या भारत में हॉलीवुड फिल्मों का आपसी मुकाबला भी होता रहा है? इस बारे में आपका दृष्टिकोण क्या है?

एक अध्ययन के मुताबिक एक औसत हिंदी भाषी भारतीय दर्शक साल में औसतन सात फिल्में सिनेमाघर में जाकर देखता है। इनमें से तीन से चार फिल्में वह हिंदी की देखता है, एक दक्षिण भारतीय फिल्म देखता है और दो से तीन फिल्में हॉलीवुड की देखता है। यानी कि एक औसत भारतीय दर्शक साल में हॉलीवुड की तीन अधिकतम फिल्में सिनेमाघरों में जाकर देखता है। जाहिर सी बात है कि मुकाबला यहां काफी कड़ा है। लोग ‘गॉडजिला’ या ‘कॉन्ग द न्यू एम्पायर’ की बजाय ‘डेडपूल एंड वूल्वरिन’ देखने आते हैं।

Denzil Dias Exclusive Interview with Pankaj Shukla Warner Bros Discovery Sacnilk Comscore Intern Deepika
कुंग फू पांडा 4 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, एनिमेशन व हॉरर?

एनीमेशन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत ही लोकप्रिय सिनेमा शैली है, लेकिन भारत में इसके दर्शक अब तक विकसित क्यों नहीं हो पाए, ये एक अध्ययन का विषय हो सकता है। इस साल की ही बात करें तो ‘इनसाइड आउट 2’ ने दुनिया भर में रिकॉर्ड कारोबार किया लेकिन भारत में इसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। ‘कुंग फू पांडा 4’ का कारोबार इससे बेहतर रहा। दैत्याकार जीवों वाली फिल्में, डरावनी फिल्मों का एक अलग दर्शक वर्ग है भारत में और ये आगे बढ़ता भी रहेगा, लेकिन मुझे लगता है कि अगर दर्शकों को सही तरीके से पोषित किया जाए तो एनीमेशन में बहुत संभावनाएं हैं। कार्टून सिर्फ घर पर देखने वाली श्रेणी है, हमें इस मानसिकता को तोड़ना होगा।

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Denzil Dias Exclusive Interview with Pankaj Shukla Warner Bros Discovery Sacnilk Comscore Intern Deepika
सिनेमाघर के बाहर की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक मानसिकता ये भी है कि हिंदुस्तान में सिनेमाघरों में फिल्में देखने अधिकतर पुरुष ही आते हैं?

हां, ये सच है कि महिला दर्शकों का एक बड़ा वर्ग है जो बड़े पर्दे पर फिल्में देखना चाहता है। लेकिन, भारत में अब भी सिनेमाघर पुरुष प्रधान हैं। हम सब इसे बदलना चाहते हैं। बहुत सारी फिल्में ऐसी हैं जिन्हें देख महिलाएं भावुक भी होती हैं और उनमें खुद का प्रतिबिंब भी पाती हैं। बड़े शहरों में तो फिर भी इसमें सुधार हो रहा है लेकिन छोटे शहरों और कस्बों में अभी इसमें महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत है।

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पुष्पा 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सिनेमा में स्थानीय संस्कृतियों का समावेश भी काफी असर डाल रहा है, आपका क्या मानना है?

कुछ चीजें सिनेमा में होती हैं जिसे हम यूनिवर्सल अपील कहते हैं। ये भावनाएं पूरी दुनिया में एक जैसी ही होती हैं, लेकिन हां, स्थानीय बातें, स्थानीय संस्कृतियां और स्थानीय लोककथाएं सिनेमा पर खासा असर डाल रही हैं। अगर कोई लोककथा वैश्विक पसंद की बन सकती है, तो इससे अच्छा और क्या ही हो सकता है। ऐसी फिल्मों को ही दूसरी भाषाओं में डब करके रिलीज किया जाता है। अगर हमारी भी कोई फिल्म तमिल, तेलुगु, कन्नड़ या मलयालम दर्शकों की भावनाओं को पोषित नहीं करती है तो उसे हम इन स्थानीय भाषाओं में डब नहीं करते हैं, जैसे कि जोकर: फोली ए ड्यूक्स।

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