बॉलीवुड में ऐसे कई अभनेता हैं, जो हीरो बनने का ख्वाब संजोकर यहां आए लेकिन किस्मत ने उन्हें विलेन बना दिया। लेकिन अपने अभिनय के दम पर इन्होंने विलेन का किरदार भी इतनी शिद्दत से निभाया कि फिल्म के हीरो भी इनके आगे फीके नजर आने लगे। आज हम आपको बता रहे हैं बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही विलेन के बारे में...
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आशुतोष राणा
- फोटो : ट्विटर
मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के रहने वाले आशुतोष राणा ने अपनी पहली ही फिल्म से ये साबित कर दिया कि उनका कोई सानी नहीं है। फिल्म दुश्मन से उन्होंने बॉलीवुड में पहचान बनाई। इस फिल्म में संजय दत्त और काजोल जैसे बड़े सितारे थे। फिल्म में उन्होंने साइको किलर का रोल किया था, जो इतना पॉपुलर हुआ कि आशुतोष एक दमदार विलेन के रूप में उभरने लगे। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर और स्क्रीन वीकली अवॉर्ड भी मिला। उनके द्वारा निभाया गया गोकुल पंडित का किरदार आज भी खूब याद किया जाता है।
शोले का गब्बर सिंह एक ऐसा विलेन था जिसके लोग दीवाने थे। जिसका एक एक डायलॉग लोगों की जुबान पर आज तक चढ़ा हुआ है। एक ऐसा विलेन जो हीरो से ज्यादा पॉपुलर था ही नहीं आज तक है। इस चरित्र को अमजद खान ने निभाया था। गब्बर ने हिंदी सिनेमा की खल-चरित्र को नया आयाम दिया। गब्बर के बाद हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने विलेन के नए नजरिये से देखना शुरू किया।
हिंदी सिनेमा के मोगैंबो यानी की अमरीश पुरी को सबसे खूंखार विलेन कहा जाए तो इसमें दो राय नहीं होगी। अमरीश पुरी नकारात्मक भूमिकाओं को वो इस ढंग से निभाते थे कि एक वक्त ऐसा आया जब हिंदी फिल्मों में 'बुरे आदमी' के रूप में लोग उन्हें पहचानने लगे। हिंदी सिनेमा के इतिहास में मोगैंबो को उनका सबसे लोकप्रिय किरदार माना जाता है। उनके इस किरदार की वजह से फिल्म के हीरो का रोल बौना साबित हो गया।
प्राण ने अपनी लाइफ का पहला रोल रामलीला में सीता के तौर पर किया था। जब प्राण फिल्मों में आए तो उन्होंने नकारात्मक भूमिका निभाई। 1940 से लेकर 1990 तक सिनेमा जगत में खलनायकी का दूसरा नाम रहे प्राण कृष्ण सिकंदर यानी कि प्राण अपने दमदार अभिनय के लिए आज भी याद किए जाते हैं। प्राण अपने किरदार को इतनी शिद्दत से निभाते थे कि लोग उन्हें रियल लाइफ में भी बुरा आदमी ही समझते थे। प्राण का रुतबा ऐसा था कि 1960 से 70 के दशक में प्राण की फीस 5 से 10 लाख रुपए होती थी।