उमराव जान', 'बाज़ार', 'कभी-कभी', 'नूरी', 'त्रिशूल' जैसी फिल्मों के गीतों की धुन बनाने वाले संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम का निधन हो गया है। इस खबर से पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने पहली बार फ़िल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली। वहीं फिल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें संगीतकार के रूप में स्थापित कर किया था।
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खय्याम
- फोटो : सोशल मीडिया
घर से निकाले गए थे
एक इंटरव्यू में खय्याम ने बताया था कि वो कैसे बचपन में छिप–छिपाकर फिल्में देखा करते थे जिसकी वजह से उनके परिवार वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। खय्याम अपने करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर करना चाहते थे पर धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी फ़िल्मी संगीत में बढ़ती गई और वह संगीत के मुरीद हो गए।
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'उमराव जान' के संगीत के लिए लग रहा था डर
एक इंटरव्यू में खय्याम ने कहा था कि 'पाकीज़ा' की कामयाबी के बाद 'उमराव जान' का संगीत बनाते समय उन्हें बहुत डर लग रहा था। उन्होंने कहा- 'पाकीज़ा और उमराव जान की पृष्ठभूमि एक जैसी थी। 'पाकीजा' कमाल अमरोही साहब ने बनाई थी जिसमें मीना कुमारी, अशोक कुमार, राज कुमार थे। इसका संगीत गुलाम मोहम्मद ने दिया था और यह बड़ी हिट फ़िल्म थी। ऐसे में 'उमराव जान' का संगीत बनाते समय मैं बहुत डरा हुआ था और वो मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी।'
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इसके आगे खय्याम ने आगे बताया था कि लोग 'पाकीजा' में सब कुछ देख सुन चुके थे। ऐसे में उमराव जान के संगीत को खास बनाने के लिए मैंने इतिहास पढ़ना शुरू किया।' ऐसे में आखिरकार खय्याम की मेहनत रंग लाई और 1982 में रिलीज हुई 'उमराव जान' ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। खय्याम ने कहा था- 'रेखा ने मेरे संगीत में जान दाल दी थी। उनके अभिनय को देखकर लगता है कि रेखा पिछले जन्म में उमराव जान ही थी।'