कोरोना काल के मसीहा कहलाए जाने वाले अभिनेता सोनू सूद अमर उजाला के साथ जुड़े, इस दौरान उन्होंने कई सवालों और मुद्दों पर अपनी राय रखी। एक तरफ जहां सोनू सूद ने ये बताया कि उनको प्रवासी मजदूरों की मदद करने की प्रेरणा कहां से मिली तो उन्होंने इस सवाल का भी जवाब दिया कि क्या जमीनी स्तर पर उतरकर मदद करते हुए उन्हें कोरोना संक्रमण का डर नहीं लगा?
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सोनू सूद
- फोटो : Social Media
दरअसल कोरोना वायरस के डर की वजह से लोग एक दूसरे के करीब जाने में डरने लगे हैं, गैरों से तो दूर बल्कि अपने परिवार के सदस्यों से भी लोगों ने दूरी ही बना ली है। ऐसे हालातों में भी सोनू सूद जमीनी स्तर पर उतरकर, हर काम की खुद बारिकी से जांच करते हुए प्रवासी मजदूरों को उनके घर जाने में मदद कर रहे हैं। ऐसे में क्या उन्हें कोरोना का डर नहीं लगा? इस सवाल का जवाब भी सोनू सूद ने दिया।
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सोनू सूद
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सोनू सूद ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा, 'मुझे परिवार की चिंता जरूर रहती है, क्योंकि मैं परिवार के साथ ही रहता हूं। मेरी वजह से मेरे परिवार को कई तकलीफ न हो, इसका मैं ध्यान जरूर रखता हूं। अगर मैं लोगों के पास नहीं जाऊंगा, उनके पास मौजूद नहीं रहूंगा तो उनको ये कभी महसूस नहीं होगा कि कोई है जो उनका हाथ थामने को तैयार है। हालांकि मैंने सभी हिदायतों का पालन भी किया है इस दौरान।'
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सोनू सूद
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सोनू आगे कहते हैं, ' जमीनी स्तर पर लोगों के साथ मौजूद रहने का फायदा ये हुआ कि लोगों को भरोसा हुआ कि हां सोनू है, जो घर पहुंचा देगा। वहीं कई ऐसे लोग जो पैदल ही अपने घर जाने की तैयारी में थे, उनको भरोसा हुआ और वो मुंबई में ही रुके कि जल्दी ही सोनू हमें भी घर पहुंचा देगा। वहीं अगर मैं घर पर बैठा होता, या सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा होता तो उन्हें कभी महसूस नहीं होता कि उनके बीच का ही कोई है जो उनके लिए मौजूद है।'
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सोनू सूद
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इस बारे में बात करते हुए सोनू ने आगे कहा, 'हां, रिस्क (खतरा) जरूर था लेकिन अगर मैं ऐसा नहीं करता तो लोगों को ये विश्वास नहीं होता कि वो अपने घर सुरक्षित और सही सलामत जा सकते हैं। क्योंकि ग्राउंड जीरो में रहने का ही नतीजा है कि लोगों में विश्वास जागा है कि कोई है जो उनकी मदद के लिए हर कोशिश कर रहा है और वो मदद मांगने के लिए आगे आए हैं'