मुकेश चंद माथुर उर्फ मुकेश ने हिंदी फिल्म जगत को कई बेहतरीन गाने दिए हैं। मुकेश के गानों में हमेशा तरोताजगी हुआ करती थी। उनके गीतों की दीवानगी आज भी देखते ही बनती है। मुश्किल से मुश्किल गीतों को भी मुकेश इतनी सहजता और मधुरता से गा लेते थे कि उनके गीत सीधे दिलों में घर कर जाते थे। मुकेश को लेकर यूं बरसों से काफी कुछ लिखा जाता रहा है। लेकिन मुकेश का एक सपना था जो अधूरा ही रह गया। आपको बताते हैं क्या मुकेश का वो सपना...
जिंदगी की आपाधापी में रह गया गायक मुकेश का ये सपना अधूरा, पूरा हो जाता तो 'आत्मकथा' पढ़ते प्रशंसक
मुकेश के जीवन पर कई पुस्तकें लिखी गई हैं। वो ऐसे अकेले पार्श्व गायक हैं जिनके गाये सभी गीतों के संकलन पर भी लेखक हरीश रघुवंशी ने 'मुकेश गीत कोश' नामक एक पुस्तक लिखी है। जिसमें मुकेश के फिल्मी गीतों के साथ उनके गैर फिल्मी गीतों को भी बेहद सलीके से संजोया गया है। फिर भी मुकेश के व्यक्तिगत जीवन, उनकी फिल्म यात्रा, उनके शौक, सपनों और समर्पण को लेकर कुछ बातें ऐसी भी है जो पहले कभी प्रकाश में नहीं आईं।
मुकेश की ऐसी बहुत सी बातों को उनके छोटे भाई परमेश्वरी दास माथुर ने सालों पहले बताया था। दरअसल बहुत साल पहले पी डी माथुर ने एक साक्षात्कार दिया था। जिसमें उन्होंने मुकेश के बारे में कुछ ऐसी बातें बताई तीं जो अब तक दुनिया को भी नहीं पता होंगी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि मुकेश का एक सपना था जो कभी पूरा नहीं हो सका। पीडी माथुर ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि मुकेश शादी से पहले रोज रात को डायरी लिखा करते थे। लेकिन शादी होने के बाद उनका डायरी लिखना कम हो गया।
उन्होंने आगे बताया था कि, 'जब मैंने मुकेश जी की लिखी डायरी देखी तो मैंने उनसे पूछा कि आप डायरी क्यों लिखते हैं।' इस पर मुकेश जी ने कहा था, 'मैं अपनी जिंदगी की यादों को संजोना चाहता हूं, खुशियों को, दुखों को, संघर्षों को। मेरी इच्छा है कि एक दिन मैं अपनी आत्मकथा लिखूं। लेकिन बदकिस्मती से उनका ये सपना पूरा नहीं हो सका।' जीवन की आपाधापी में मुकेश समय से पहले ही दुनिया से चले गए। वरना उनके और भी बहुत से गीत हम सभी को सुनने को मिलते और शायद उनकी आत्मकथा भी पढ़ने को मिलती।
बता दें कि मुकेश ने आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, जीना यहां मरना यहां, इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, कहीं दूर जब दिन ढल जाये, सजन रे झूठ मत बोलो, किसी की मुस्कुराहटों पर हो निसार, दोस्त दोस्त न रहा, कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, चांद सी महबूबा हो मेरी, क्या खूब लगती हो, चंदन सा बदन चंचल चितवन और होठों पर सच्चाई रहती है जैसे गीतों को अपनी मधुर आवाज से तराशा है। उनके गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने उस समय में हुआ करते थे।
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