सुशांत सिंह राजपूत का पिछले साल 14 जून को निधन हो गया था। अब उनको गुजरे एक साल होने जा रहा है। ऐसे में सुशांत के करीबी और फिल्म डायरेक्टर रूमी जाफरी ने उन्हें याद किया है और अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। दरअसल, एक खास बातचीत के दौरान रूमी ने एक बड़ी बात कही है। रूमी का कहना है कि काश खुदा कोई ऐसा करिश्मा कर दे कि मैं सुशांत को डांट लगा कर पूछ सकूं कि भाई तुमने आखिर ऐसा क्यों किया, क्यों हम सब को छोड़ कर ऐसे ही चले गए।
दोस्त को याद कर भावुक हुए रूमी जाफरी
रूमी कहते हैं कि जैसा कि सुशांत मेरे दोस्त जैसा था। वो मुझसे जूनियर भले ही था लेकिन मैंने उससे कई चीजें सीखी हैं। इतना अच्छा इंसान, हमेशा हंसते रहना, काम की बात करना, मेरे घरवालों को अपना परिवार जैसा सम्मान देना और साथ ही एक ऐसा कलाकार जो प्रतिभा से भरा हो बहुत कम लोग ऐसे होते हैं। मुझे सुशांत के परिवार के बारे में सोच कर बहुत दुख होता है कि जिन्होंने उन्हें पाल पोसकर बड़ा किया, वो कैसा महसूस करते होंगे। हम कुछ ही दिन से सुशांत को जानते थे लेकिन इतने कम समय में ही दिल का रिश्ता जुड़ गया था।
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सुशांत सिंह राजपूत
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी सिनेमा के जाने-माने पटकथा लेखक और निर्देशक रूमी जाफरी आगे कहते हैं, 'सुशांत का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए तो एक बड़ा लॉस है ही लेकिन मेरे लिए यह निजी क्षति है। मैं उस लड़के को कभी नहीं भूल सकता। भगवान करें जहां भी अब वो हो उन्हें खुश रखें।'
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सुशांत सिंह राजपूत
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके आगे रूमी ने कहा, 'मुझे याद है की पिछले साल लॉकडाउन चल रहा था तभी हमने प्लान किया था कि मई के महीने में हम अपनी फिल्म की शूटिंग करेंगे। सब जानते हैं कि सुशांत एक अच्छे एक्टर होने के साथ एक जबरदस्त डांसर भी थे। तभी सुशांत ने मुझसे कहा था कि सर मैं इस गाने में जमकर डांस करूंगा।'
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सुशांत सिंह राजपूत
- फोटो : सोशल मीडिया
'उससे पहले सुशांत की जितनी भी फिल्में आई थी उनमें सुशांत ने डांस तो किया था लेकिन जैसा वो करने का दम रखते थे, वो वैसा नहीं था। हम उस फिल्म में वो भी पूरा करने वाले थे। हमने साथ में प्लान किया था कि सरकारी गाइड लाइन के हिसाब से कम लोग यूनिट में रखेंगे।'
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सुशांत सिंह राजपूत, रूमी जाफरी
- फोटो : सोशल मीडिया
रूमी आगे कहते हैं, 'सुशांत की मौत से पहले जो फिल्म बनाई जा रही थी उस कहानी को अब बनाना मेरे लिए नामुमकिन है। मैंने पहले ही बताया था कि सुशांत को ध्यान में रख कर ही वो कहानी लिखी गई थी। अब जब वो ही नहीं रहा तो उस कहानी का कोई मतलब नहीं। वो लड़का और उसका हंसता, खिलखिलाता हुआ चेहरा मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।'