अपने जमाने के चॉकलेटी हीरो के रूप में पॉपुलर ऋषि कपूर ने 68 साल की उम्र में पिछले साल इस दुनिया को अलविदा कहा। उनका जन्म 4 सितंबर 1952 में मुंबई के चेंबूर में हुआ। ऋषि ने 1973 से लेकर साल 2000 के बीच करीब 92 फिल्मों में रोमांटिक लीड का किरदार निभाया। साल 2008 में उनको फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। ऋषि शोमैन राज कपूर के मंझले बेटे थे। फिल्म इंडस्ट्री में उनको उनके निक नेम चिंटू से जाना जाता था।
किस्से बॉलीवुड के: जब एक चॉकलेट के लिए ऋषि कपूर ने दिया शॉट, नरगिस बोलीं- आंखें खुली रखना और रोना मत
जब नरगिस के मनाने पर ऋषि कपूर ने दिया शॉट
ऋषि कपूर को फिल्म श्री 420 में एक शॉट देना था। इस शॉट में उनको अपने भाई-बहन के साथ बारिश में चलना था। लेकिन उस वक्त जैसे ही बारिश की बूंदें ऋषि पर पड़ती थी, वो रोने लगते थे। जिसके कारण शूटिंग नहीं हो पा रही थी। इसके बाद नरगिस ने ऋषि कपूर को मनाया।
नरगिस ने ऋषि कपूर से कहा कि अगर वो रोएंगे नहीं और अपनी आंखों को खुली रखेंगे तो उनको चॉकलेट दी जाएगी। उस वक्त ऋषि को एक छोटे से रोल के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। नरगिस के मनाने और चॉकलेट का लालच देने पर ऋषि ने यह शॉट सही से दिया। ऋषि कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा किया था। उनका कहना था कि चॉकलेट का लालच देने पर न मैं रोया और न ही मैंने आंखें बंद कीं और इस तरह मेरा पहला शॉट शूट हुआ। इस तरह फिल्म 'श्री 420' 1955 में रिलीज हुई। फिल्म में राज कपूर और नरगिस लीड रोल में थे। ऋषि कपूर फिल्म के एक गाने 'प्यार हुआ इकरार हुआ' में थोड़ी देर के लिए ही दिखाई दिए थे। इस गाने में बारिश में राज कपूर और नरगिस के पीछे चलने वाले तीन बच्चों में से एक ऋषि कपूर थे। उस वक्त उनकी उम्र तीन साल थी।
फिल्म 'श्री 420' के बाद ऋषि ने 1970 में आई फिल्म 'मेरा नाम जोकर' में अभिनय किया था। फिल्म में ऋषि ने राज कपूर के बचपन का किरदार निभाया था। इस फिल्म को लेकर भी मजेदार किस्सा है। जिसे खुद ऋषि ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था। उनका कहना था, उस वक्त हम सभी खाना खा रहे थे।
पिता राज कपूर ने 'मेरा नाम जोकर' फिल्म में मुझे कास्ट करने की बात मां कृष्णा को बताई। पिता ने मां से कहा कि वो मुझे इस फिल्म में अपने यंग वर्जन प्ले करने के लिए कास्ट कर रहे हैं। उस वक्त उनकी मां नहीं चाहती थी कि वो फिल्मों में काम करें, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी। ऋषि, मां और पिता की बात को सुनने के बाद खाना खाकर अपने कमरे में आ गये और अपनी स्टडी टेबल की दराज से एक फुल शीट निकाली और उस पर ऑटोग्राफ देने की प्रैक्टिस करने लगे।