कामयाब इंसान की पहचान सिनेमा में एक दौलतमंद कलाकार के तौर पर ही होती है लेकिन सुपरस्टार रणवीर सिंह मानते हैं कि कामयाबी की सही पहचान पैसा नहीं बल्कि खुद के भीतर कायम भरोसा और अपने पसंदीदा काम में रमे रहने का मौका मिलना है। वह बताते हैं कि कैसे संघर्ष के दिनों में वह अपने फोन की घंटी बजने का चौबीसों घंटे इंतजार किया करते थे।
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Ranveer Singh
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रणवीर सिंह ने हाल ही में अपनी फिल्म 83 की शूटिंग पूरी की है और अब वह अपनी अगली फिल्म तख्त की तैयारियां शुरू कर चुके हैं। अपने आठ साल के करियर की तरफ रणवीर अब भी मुड़ मुड़कर देखते जरूर रहते हैं।
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बैंड बाजा बारात, राम लीला, बाजीराव मस्तानी, पद्मावत और गली बॉय जैसी फिल्में उनकी इन यादों में मजबूत जगह बना चुकी हैं तो 83, जयेशभाई जोरदार और तख्त उनके आने वाले दिनों के सपनों का हिस्सा हैं।
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Ranveer Singh
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
बीते समय की इन्हीं यादों का जिक्र चला तो रणवीर सिंह भावुक हो गए और बोले "सच पूछिए तो उन दिनों के संघर्ष ने ही मुझे जिंदगी की सबसे हसीन यादें दी हैं। आज सब कुछ मेरे पास है पर मैं हमेशा उस समय को याद रखूंगा जब मेरे पास कुछ नहीं था। जिस वक्त मैं बहुत ही छोटे काम किया करता था और फिल्मों में एक बड़े ब्रेक का इंतजार करता था। वह काफी कठिन समय था। लगता था शायद ही कभी मेरे फोन की घंटी कभी बजेगी। मेरा मानना है कि ऐसे समय में मिले कठोर सबक, निराशा, अपमान, अस्वीकृति के बीच ही हमें आशा की एक किरण ढूंढनी होती है।'
रणवीर आगे कहते हैं, 'मेरे लिए मेरी जिंदगी में दो ही लक्ष्य रहे हैं। पहला मैं अभिनय करने के लिए आतुर था और मैं इसे सिर्फ पैसे और प्रसिद्धि के लिए नहीं करना चाहता था। दूसरा आत्मविश्वास, मैं हर वक्त अपने आपसे यही कहता रहा कि मुझे खुद पर विश्वास रखना होगा और अपने पथ पर बने रहना रहना होगा। मैंने उस दिन से लेकर आज तक उस आत्मविश्वास को बनाए रखा है और आगे भी बनाए रखूंगा।'