रानी मुखर्जी के करियर में दर्शक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ में उनकी अदाकारी की तारीफ आज भी करते हैं। इसके बाद आई एक और फिल्म ‘हिचकी’ में भी रानी मुखर्जी ने एक अक्षम किरदार कामयाबी के साथ निभाया। ‘ब्लैक’ की दिव्यांग लड़की मिशेल मैकनली की भूमिका में उनके निर्दोष अभिनय तथा सुपरहिट ‘हिचकी’ में टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित नैना माथुर वाले उनके किरदार ने एक नई सामाजिक बहस को जन्म दिया। विश्व दिव्यांग दिवस पर रानी ने अपने इन दोनों किरदारों के बारे में खास बातें साझा की हैं।
रानी मुखर्जी ने ऐसे की थी ‘ब्लैक’ और ‘हिचकी’ के किरदारों की तैयारी, दिव्यांग दिवस पर साझा किए राज
रानी कहती हैं, “ये दोनों फिल्में अद्भुत व संवेदनशील फिल्में रही हैं। इनमें काम करके मैंने मानवता के बारे में बहुत कुछ सीखा। मेरा मानना है कि मुझे एक बेहतर मनुष्य बनाने में इन फिल्मों का हाथ रहा है। मैं खुद को सौभाग्यशाली समझती हूं कि मुझको इन फिल्मों में काम करने तथा संजय लीला भंसाली और सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा के ऐसे खूबसूरत सिनेमैटिक विजन का हिस्सा बनने का मौका मिला। मैं उम्मीद करती हूं कि ये फिल्में सबके साथ बराबरी का वर्ताव करने की जरूरत को लेकर समाज के अंदर सार्थक पहल करने में सफल रहीं।”
रानी का कहना है कि मिशेल मैकनली और नैना माथुर के किरदारों ने एक मनुष्य के तौर पर उन्हें मजबूत बनाया है। वह आगे बताती हैं, “मैं ऐसे लोगों के संकल्प से वाकिफ हुई जो अपनी आकांक्षांओं के रास्ते में खड़ी तमाम बाधाओं के बावजूद विजयी होने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ रहते हैं। इन दमदार लड़कियों के किरदार को स्क्रीन पर जीवंत करके मैं एक मजबूत इंसान बनी हूं। ईश्वर की कृपा से मैं बोल सकती हूं, देख सकती हैं, सुन सकती हूं; और इंसान होने के नाते मैं इसे महसूस कर सकती हूं। हो सकता है कि हम लोग इन चीजों की कदर ही न जानते हों।”
रानी का मानना है कि दिव्यांग होने के चलते लोगों के स्टीरियोटाइप बनाना हर कीमत पर बंद होना चाहिए। वह कहती हैं, “मेरे लिए ‘ब्लैक’ और ‘हिचकी’ ऐसे इमोशनल अनुभव थे कि सबको साथ लेकर चलने, लोगों के प्रति दयालु होने तथा जो कुछ भी हमारे पास है, उसको लेकर कृतज्ञ होने की तरफ मेरी आंखें और ज्यादा खुल गईं।''
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