अभिनेता अक्षय कुमार के साथ इस साल ऐसा दूसरी बार हुआ है जब वह अपनी किसी नई फिल्म के मुहूर्त में काले कपड़े पहनकर पहुंचे। सनातन धर्म में लंबे समय तक काले कपड़ों को पूजा के विधि विधान के विपरीत माना गया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काले कपड़ों में कुंभ स्नान करने से ये धारणा तेजी से बदल रही है।
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अक्षय कुमार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सनातन धर्मग्रंथों के जानकार बताते हैं कि भगवान वराह ने वराहपुराण में पूजन के जिन नियमों का उल्लेख किया है उनके अनुसार पूजन में कुछ विशेष रंग के कपड़े पहनकर नहीं बैठना चाहिए। पूजन में नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इन दो रंगों को शुभ कार्यों के लिए युगों से अमंगलकारी ही माना जाता है। अब भी परंपरावादी परिवारों में पूजा के समय काले रंग कपड़े पहने किसी स्त्री या पुरुष को मुख्य पूजास्थल से दूर ही रखाजाता है।
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फिल्म राम सेतु के मुहूर्त की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला,मुंबई
लेकिन, पहले दिल्ली के दाती महाराज और इन दिनों ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु काले रंग को अशुभ नहीं मानते हैं। ईशा फाउंडेशन के मुताबिक कोई चीज काली है या आपको काली प्रतीत होती है, इसकी वजह यह है कि यह कुछ भी परावर्तित नहीं करती, कुछ भी लौटाती नहीं,सब कुछ सोख लेती है। तो अगर आप किसी ऐसी जगह हैं, जहां एक विशेष कंपन और शुभ ऊर्जा है तो आपके पहनने के लिए सबसे अच्छा रंग काला है क्योंकि ऐसी जगह से आप शुभ ऊर्जा ज्यादा से ज्यादा अवशोषित करना चाहेंगे, आत्मसात करना चाहेंगे।
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फिल्म राम सेतु मुहूर्त
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इसी तरह इशा फाउंडेशन का ये भी मानना है कि जब आप दुनिया से घिरे होते हैं, लाखों-करोड़ों अलग-अलग तरह की चीजों के संपर्क में होते हैं, तो सफेद कपड़े पहनना सबसे अच्छा है, क्योंकि आप कुछ भी ग्रहण करना नहीं चाहते, आप सब कुछ वापस कर देना, परावर्तित कर देना चाहते हैं।
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पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शैव भक्तों से जब इस बारे में बात की गई तो वह कहते हैं कि शिव को हमेशा काला माना जाता है क्योंकि किसी भी चीज को ग्रहण करने में उन्हें कोई समस्या नहीं है। यहां तक कि जब उन्हें विष दिया गया तो उसे भी उन्होंने सहजता से पी लिया। उनमें खुद को बचाए रखने की भावना नहीं है, क्योंकि उनके साथ ऐसा कुछ होता भी नहीं है। इसलिए वह हर चीज को ग्रहण कर लेते हैं, किसी भी चीज का विरोध नहीं करते।