दिल्ली में परवरिश और पढ़ाई लिखाई के बाद कन्नड़ सिनेमा से बड़े परदे पर कदम रखने वाली अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह के लिए साल 2021 काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। अजय देवगन की फेवरिट हीरोइन का तमगा हटाने के लिए उन्होंने दूसरे अभिनेताओं के साथ भी दमदार फिल्में साइन करनी शुरू की हैं। मृणाल ठाकुर के फिल्म ‘डॉक्टर जी’ छोड़ने के बाद रकुलप्रीत ही आयुष्मान की हीरोइन बनी हैं।
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rakul preet singh
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रकुल कहती हैं, “मैंने 12वीं के बाद मॉडलिंग करना शुरू किया। मॉडलिंग के बीच में ही मुझे कन्नड़ फ़िल्म का ऑफर मिला। पहले तो मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे पता ही नहीं था कि दक्षिण भारत भी अलग फ़िल्म इंडस्ट्री है। फिल्म बनाने वालों ने इसके बाद मेरे पिताजी से बात की और उनकी सलाह पर अनुभव हासिल करने और पॉकेट मनी के लिए मैंने इस फिल्म के लिए हां कर दी। मैंने फ़िल्म की तो मुझे बहुत मज़ा आया। इसके बाद ही मैंने अभिनेत्री बनने का फैसला किया, लेकिन मैंने फिर भी कॉलेज नहीं छोड़ा।”
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रकुलप्रीत ने कोरोना से भी जंग लड़ी और इससे जीतने के बाद दूसरों को भी हिम्मत बंधाने का काम करती रहीं। अजय देवगन की दो फिल्मों में वह काम कर रही हैं। ‘मे डे’ और ‘थैंक गॉड’ उनके लिए काफी खास हैं। अर्जुन अब्राहम की फिल्म ‘अटैक’ में भी उनका काफी दमदार रोल बताया जा रहा है। हिंदी सिनेमा में राकुलप्रीत का नाम भी हो रहा है और काम भी बढ़ रहा है। और उन्हें अभी आगे बहुत दूर तक जाना है।
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रकुलप्रीत बताती हैं, “मैंने पहली फिल्म के साथ साथ अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की ताकि कभी जरूरत पड़े तो अभिनय के अलावा भी कुछ काम मिल सके। कन्नड़ फिल्म के बाद ही मैं मुंबई आ गई थी।यहीं आकर मुझे हिंदी की पहली फ़िल्म 'यारियां' मिली। 'यारियां' की शूटिंग खत्म होने के दो दिन पहले ही मेरी एक तेलुगु फ़िल्म रिलीज हो गई और बहुत बड़ी हिट हो गई। इसी वजह से मैंने तीन-चार फिल्में साइन कर लीं और मैं दक्षिण भारतीय सिनेमा में व्यस्त हो गई।”
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Rakul Preet Singh
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सिनेमा में अपने पैर टिकाने के पीछे वह अपनी मां को सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं। वह कहती हैं, “मेरी मां ने मेरा पूरा साथ दिया। जब मैं छोटी थी तो पापा से बहुत सी चीजें मांगा करती थी। फिर मेरा छोटा भाई आ गया। लोगों का ध्यान उसकी तरफ हो गया तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। मैं अपने भाई को बहुत परेशान करती थी। मेरी मां ही थीं जिन्होंने मुझे एक्टिंग करने के लिए प्रेरित किया। पहले तो मुझे मेरी मां की बात का भरोसा नहीं होता था। मैं सोचती थी कि ऐसे ही बोल रही हैं।”