साल 2021 की शुरुआत में भले दक्षिण भारतीय तमिल अभिनेता विजय अपनी फिल्म ‘मास्टर’ का डंका देश के हिंदी भाषी क्षेत्रों में न बजा पाए हों, पर तेलुगू अभिनेता अल्लू अर्जुन की नई फिल्म ‘पुष्पा पार्ट वन’ ने उत्तर भारत में हंगामा कर दिया है। फिल्म के हिंदी संस्करण ने पहले चार दिनों में सवा सोलह करोड़ रुपये की कमाई करके उन हिंदी फिल्म निर्माताओं की पेशानी पर बल डाल दिए हैं जो कहानियों की बजाय अब तक सिर्फ सितारों के पीछे भागते रहे हैं। ‘अमर उजाला’ से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में फिल्म ‘पुष्पा’ के निर्देशक सुकुमार बताते हैं कि दरअसल एक वेब सीरीज के सिलसिले में वह लाल चंदन की तस्करी पर रिसर्च कर रहे थे। दक्षिण भारत से जापान को होने वाली लाल चंदन की तस्करी के आंकड़ों ने उन्हें हैरान कर दिया और तब उन्हें लगा कि ये पृष्ठभूमि तो किसी फीचर फिल्म के लायक है।
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पुष्पा द राइज
- फोटो : insta/pushpa_film_
निर्देशक सुकुमार इससे पहले भी अभिनेता अल्लू अर्जुन को लेकर दो फिल्में ‘आर्या’ और ‘आर्या 2’ बना चुके हैं। वह कहते हैं, ‘अल्लू अर्जुन ने उत्तर भारत में अपना एक अलग दर्शक वर्ग बनाया है। और, ये दर्शक वर्ग उनकी हिंदी में डब होकर सैटेलाइट पर प्रसारित होने वाली फिल्मों के अलावा यूट्यूब पर मौजूद उनकी डब फिल्मों के जरिये भी बना है। इसी के चलते पहली बार अल्लू अर्जुन को बड़े परदे पर देखने का मोह उनके फैंस को भारी संख्या में सिनेमाघरों तक ले आया है।’
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पुष्पा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सुकुमार का कहना सही भी है। फिल्म ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ के सामने जब हिंदी सिनेमा के बड़े से बड़े सितारे को अपनी फिल्म रिलीज करने की हिम्मत नहीं हुई तो अल्लू अर्जून ने ही अपनी फिल्म ‘पुष्पा पार्ट वन’ पर भरोसा जताते हुए इसे एक हफ्ता पहले ही रिलीज कर दिया। ये काम उन्होंने फिल्म ‘83’ को पूरे देश में अच्छी रिलीज मिलने के लिए सदाशयता दिखाते हुए किया था और उनका ये ‘पुण्य’ उनकी फिल्म के लिए खूब फल रहा है। पहले दिन हिंदी में सिर्फ तीन करोड़ कमाने वाली फिल्म का कारोबार शनिवार को चार करोड़ और रविवार को पांच करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फिल्म ने सोमवार को भी सवा चार करोड़ रुपये की शानदार कमाई की।
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सुकुमार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘बाहुबली’ को सुकुमार भी दक्षिण भारतीय सितारों की उत्तर भारत में डब फिल्मों के जरिये होने वाली पहुंच का टर्निंग प्वाइंट मानते हैं। ‘अमर उजाला’ से इस एक्सक्लूसिव बातचीत में सुकुमार कहते हैं, ‘हिंदी सिनेमा, तमिल सिनेमा, तेलुगू सिनेमा, ये सब अब बीते दिनों की बाते हैं। अब समय भारतीय सिनेमा का है। और, फिल्म अगर अच्छी होगी। कहानी उसकी दर्शकों को भाएगी और उसकी मेकिंग अंतर्राष्ट्रीय स्तर की होगी तो अब देश की हर भाषा की फिल्म हर भाषा के दर्शक देखने को तैयार हैं।’
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सुकुमार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कोरोना संक्रमण काल इस लिहाज से भारतीय सिनेमा के लिए वरदान की तरह रहा है। इस समय ने हिंदी पट्टी के करोड़ों दर्शकों को ‘मारा’ और ‘जय भीम’ जैसी फिल्मों का स्वाद चखाया। इसके अलावा दुनिया की तमाम अलग अलग भाषाओं की वेब सीरीज और फिल्में देखकर उनका फिल्म देखने का स्वाद वैसे भी परिष्कृत हो चुका है। सुकुमार कहते हैं, ‘सिनेमा भाषाओं की सरहदें तोड़ रहा है। दर्शकों को अच्छे सिनेमा का स्वाद लग चुका है। सितारे अपनी जगह चमकते रहेंगे लेकिन अखिल भारतीय सफलता पाने के लिए फिल्म को समग्र होना जरूरी होगा।’ अपनी अब तक की फिल्म यात्रा को सुकुमार नए नए सबक के तौर पर लेते रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मौका मिला तो मैं हिंदी फिल्म भी एक दिन जरूर बनाना चाहूंगा।’