जब भी
विलेन शब्द दिमाग में आता है तो दिमाग में एक भयानक और डरावनी छवि उभरती है...एक ऐसा चेहरा नजरों के सामने आता है जो हाथों में पिस्तौल थामे लोगों को डरा-धमका रहा है....गले में एक छोटा सा रुमाल बांधा हुआ है और लंबे, फैले हुए बाल हैं, लेकिन
बॉलीवुड के मशहूर विलेन रहे एक्टर अजीत की छवि इससे बिल्कुल उलट थी।
हिंदी सिनेमा को शायद पहली बार एक ऐसा विलेन मिला था जो काफी सौम्य और प्रभावशाली ढंग से अपने विलेन के किरदार को फिल्मी परते पर जीवित कर देता था। अजीत का असली नाम हामिद अली खान था। वो बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे और इसी का सपना लिए वो घर से भागकर मुंबई आ गए थे।
अजीत पर अपने इस सपने को पूरा करने का जुनून इस कदर सवार था कि उन्होंने अपनी किताबें तक बेच डालीं थीं। 1940 में अजीत ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने कुछ फिल्मों में बतौर हीरो काम किया लेकिन वो फ्लॉप रहे।
जितनी भी फिल्मों में अजीत हीरो के तौर पर नजर आए वो सभी कामयाब नहीं हो पाईं। लगातार फ्लॉप से निराश ना होकर अजीत ने फिल्मों में विलेन के रोल करने शुरू दिए।
विलेन बनकर तो अजीत ने ऐसा स्टारडम पाया जो शायद ही किसी हीरो को मिला हो। विलेन के तौर पर ना सिर्फ उनके किरदारों को सराहा गया बल्कि उनके कई डायलॉग और वन लाइनर जबरदस्त हिट हुए।
आज भी जब अजीत के नाम का जिक्र होता है तो अनायास ही 'मौना डार्लिंग', 'लिली डोंट भी सिली' और 'लॉयन' जैसे डॉयलॉग जुबां पर आ जाते हैं।