गायिकी की दुनिया का बेताज बादशाह, फनकार ऐसा जिसे सदियां भुला नहीं पाएंगी। गुरूर नहीं ये अपने हुनर पर भरोसा था तभी तो खुद ही कह दिया 'तुम मुझे यूं भूला न पाओगे...'। ये और कोई नहीं बल्कि
बॉलीवुड के शहंशाह-ए-तरन्नुम
मोहम्मद रफी हैं।
रफी साहब ने अपनी जिंदगी में करीब 26 हजार से भी ज्यादा गाने गाए हैं। नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित रफी साहब का इंडस्ट्री में खूब रुतबा था लेकिन सुरों के बादशाह का ये सफर इतना आसान नहीं था। उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा भी वक्त देखा है जब उनके पास घर लौटने के पैसे नहीं हुआ करते थे।
बात तब की है जब बॉलीवुड में नौशाद का जलवा हुआ करता था और मोहम्मद रफी कोरस में गाते थे। रफी साहब के ये दिन काफी मुश्किल भरे थे। एक दिन उन्हें नौशाद के साथ कोरस में गाने का मौका मिला। रफी इस मौके को गंवाना नहीं चाहते थे, इसलिए वो जैसे-तैसे स्टूडियो पहुंच गए।
रफी जब स्टूडियो पहुंचे तो उन्हें मालूम पड़ा कि रिकॉर्डिंग कैंसिल हो गई है। सभी लोग स्टूडियो से चले गए लेकिन निराश मोहम्मद रफी वहीं खड़े रहे। जब नौशाद साहब ने रफी को देखा तो उन्होंने पूछा कि वो अब तक यहां क्यों खड़े हैं? रफी ने मायुसी में कहां कि उनेक पास घर जाने के पैसे नहीं हैं। उन्हें लगा रिकॉर्डिंग हो जाएगी तो उसके मेहताने से वो घर पहुंच जाएंगे।
नौशाद ने तब रफी को 1 रुपये का सिक्का दिया था ताकि वो घर पहुंच जाएं। रफी ने नौशाद से वो सिक्का लिया और चल पड़े। इसके कई सालों बाद रफी शहंशाह-ए-तरन्नुम बन गए। उनके पास खूब दौलत और शोहरत हो गई। तब एक दिन नौशाद साहब मोहम्मद रफी के घर आए। उन्होंने देखा कि मोहम्मद रफी ने 1 रुपये का सिक्का फ्रेम करा दीवार पर टांग रखा है। नौशाद ने इसका कारण जानना चाहा।