भारतीय सिनेमा के सबसे सफल गायकों में से एक सदाबहार मोहम्मद रफी की 31 जुलाई को पुण्यतिथि है। मोहम्मद रफी के मशहूर के गानों के बारे में तो आप सभी जानते होंगे लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से ऐसे हैं जिसे जानकर आपको खुशी होगी। अगर एक गाने में इजहार-ए-इश्क की एक सौ एक विधाएं दर्शानी हों तो आप सिर्फ एक ही गायक का नाम ले सकते हैं वो हैं मोहम्मद रफी।
आज बेशक रफी साहब हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी खूबसूरत नग्में आज भी हमारी यादों में ताजा हैं। रफी साहब को पहला ब्रेक पंजाबी फिल्म 'गुलबलोच' में मिला था। नौशाद और हुस्नलाल भगतराम ने रफी की प्रतिभा को पहचाना और खय्याम ने फिल्म 'बीवी' में उनसे गीत गवाए।
बीबीसी के एक लेख के मुताबिक, खय्याम याद करते हैं, "1949 में मेरी उनके साथ पहली गजल रिकॉर्ड हुई जिसे वली साहब ने लिखा था। अकेले में वह घबराते तो होंगे, मिटाके वह मुझको पछताते तो होंगे। रफी साहब की आवाज के क्या कहने! जिस तरह मैंने चाहा उन्होंने उसे गाया। जब ये फिल्म रिलीज हुई तो ये गाना रेज ऑफ द नेशन हो गया।" बैजू-बावरा में प्लेबैक सिंगिंग करने के बाद रफी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मोहम्मद रफी साहब के बारे में कहा जाता है जब एक स्टेज शो के दौरान बिजली जाने की वजह से उस जमाने के जाने माने गायक केएल सहगल ने गाना गाने से मना कर दिया, तो वहां मौजूद 13 साल के रफी ने स्टेज संभाला और गाना शुरू कर दिया और यहीं से खुली मोहम्मद रफी की किस्मत।
संगीतकार नौशा मोहम्मद रफी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाते थे। एक बार एक अपराधी को फांसी दी जी रही थी। उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने कहा कि वो मरने से पहले रफी का बैजू बावरा फिल्म का गाना 'ऐ दुनिया के रखवाले' सुनना चाहता है। अपराधी की ख्वाहिश पूरी करने के लिए टेप रिकॉर्डर लाया गया और उसके लिए वह गाना बजाया गया।
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