भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के अवार्ड से मिलते जुलते नामों वाले पुरस्कारों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली मॉडल व अभिनेत्री निकिता घाग के अपना दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवार्ड लौटाने के एलान पर खूब बधाइयां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग निकिता की इस हिम्मत पर दाद दे रहे हैं। निकिता का कहना है कि सरकार को राष्ट्रीय पुरस्कारों के बारे में आम जनता को ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जानी चाहिए ताकि आम लोग असली और नकली पुरस्कारों का भेद समझ सकें। हाल के दिनों में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से मिलते जुलते नामों के अलावा कई अन्य नागरिक सम्मानों से मिलते जुलते पुरस्कार भी कुछ संस्थानों ने शुरू कर दिए हैं।
Nikkita Returns Phalke Award: फाल्के पुरस्कार लौटाते ही निकिता को मिली बधाइयां, लोग बोले, देर आए दुरुस्त आए
निकिता कहती हैं, ‘मेरे जैसे तमाम नए कलाकारों को पता ही नहीं होता कि दादा साहब फाल्के के नाम पर भारत सरकार सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के रूप में देती है।’ दादा साहब का सम्मान बनाए रखने के लिए इस पुरस्कार से मिलते जुलते नामों पर रोक लगाने की मांग भी निकिता ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से की है। निकिता कहती हैं कि फिल्म नगरी में शो बिजनेस चलता है लेकिन राष्ट्रीय सम्मान वाले पुरस्कारों से मिलते जुलते नामों वाले पुरस्कारों का बिजनेस बंद होना चाहिए।
Ananya Panday: विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्म में नजर आएंगी अनन्या, शूटिंग खत्म होने पर लिखा इमोशनल नोट
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी मॉडल या अदाकारा ने खुद को मिले दादा साहब इंटरनेशनल अवार्ड को लौटाने की घोषणा की हो। बीते नौ साल से जानवरों की देखभाल करने वाली संस्था दावा इंडिया चलाने वाली सुपरमॉडल निकिता घाग कहती है, ‘किसी भी अच्छे काम के लिए हमें पुरस्कार मिलता है तो इससे हमारा अच्छा काम करने का हौसला और बढ़ता है। प्रशंसा ही किसी अच्छे सामाजिक कार्य का सबसे बडा पुरस्कार है लेकिन मुझे मिले ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार के पीछे एक पूरा सिस्टम काम कर रहा है, ये मुझे बीते तीन चार दिनों में ही पता चला है।’
Guneet Monga: 'पगलेट' की सफलता के बाद गुनीत मोंगा ने उमेश बिष्ट से फिर मिलाया हाथ, नई फिल्म के लिए किया साइन
दादा साहब फाल्के के नाती चंद्रशेखर पुसालकर ने अपने नाना के जन्मदिन पर ‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत में कहा भी था, ‘दादा साहब फाल्के के परिवार वाले खुद को भारत सरकार का ऋणी मानते हैं कि दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत उनके नाम पर की गई। सिनेमा के इस सबसे बड़े अवार्ड की वजह से आज दादा साहब फाल्के को हर कोई जनता है। लेकिन, इसी पुरस्कार से मिलते जुलते पुरस्कारों के नाम पर पर लोग दुकानदारी चलाते हैं तो दुख होता है। दुख होता है ये देखकर कि एक तरफ अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियत को दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया जाता है तो दूसरी तरह यहां मुंबई में कोई भी फाल्के के नाम पर अवार्ड लेकर चला जाता है।’
Salman Khan: शाहरुख खान नहीं सलमान बनने वाले थे ‘बाजीगर’ के विक्की मल्होत्रा, इस वजह से भाईजान ने छोड़ी फिल्म
इस बारे में निकिता घाग कहती हैं कि नई पीढ़ी को आमतौर पर इतनी बारीकियां पुरस्कारों के बारे में पता नहीं होतीं। निकिता के मुताबिक, ‘नई पीढ़ी को समझाने की जिम्मेदारी उन सारे लोगों पर है जिनको दुनिया अपना आदर्श मानती है। मैं इस साल दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवार्ड स्वीकार करने वाले युवा कलाकारों खासतौर से आलिया भट्ट और रणबीर कपूर से अपील करती हूं कि वे ये नकली ‘दादा साहब फाल्के अवार्ड’ लौटाएं ताकि दुनिया को पता चल सके कि इस नाम की पवित्रता क्या है और इस नाम से जुड़े सिनेमा के सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मान की हम सब परवाह करते हैं।’
Gallan Mitthiyan: रिलीज हुआ मीत का रोमांटिक ट्रैक 'गल्लां मिठियां', एक दिन में बटोरे रिकॉर्डतोड़ व्यूज