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Death anniversary: युवा दिलों के हाल को बखूबी समझने वाले शायर, गीतकार कैफी आजमी ने 11 साल की उम्र में लिख दी थी पहली गजल

Tue, 10 May 2022 11:01 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Tue, 10 May 2022 11:01 AM IST
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Famous poet-lyricist of the Hindi film industry Kaifi Azmi written his first Ghazal at the age of 11
कैफी आजमी - फोटो : सोशल मीडिया

शायरी की कैफियत का जब-जब जिक्र होगा, कैफी आजमी का नाम आना लाजिमी है। वह अपने दौर के प्रगतिशील शायर और लेखकों में रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ प्यार, इश्क, दर्द, जुदाई और तकलीफों को अपने शब्द  दिए, बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी कलमबद्ध किया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए कई शानदार गाने लिखे, जो आज भी काफी पसंद किए जाते हैं। उनके लिखे गीत, 'ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं', 'मिलो न तुम तो हम घबराए', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम' जैसे गाने आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं। आज उनकी पुण्यतिथि है। 

Famous poet-lyricist of the Hindi film industry Kaifi Azmi written his first Ghazal at the age of 11
कैफी आजमी - फोटो : सोशल मीडिया

गांव से लगा शेर और शायरी का शौक
कैफी आजमी उर्दू के मशहूर शायर और बॉलीवुड के बड़े गीतकार रहे हैं। उनका असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में 14 जनवरी 1919 को हुआ था। उन्हें गांव से शेर व शायरी पढ़ने का शौक लगा। भाइयों ने साथ दिया तो उन्होंने खुद लिखना शुरू किया। 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली गजल लिखी। 10 मई 2002 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।

Famous poet-lyricist of the Hindi film industry Kaifi Azmi written his first Ghazal at the age of 11
कैफी आजमी - फोटो : सोशल मीडिया

गजल का शौक ले आया मायानगरी
किशोर होते-होते मुशायरे में शामिल होने लगे। गजल लिखने का यही शौक उन्हें मुंबई ले आया। अपने जीवन में उन्होंने खूब शोहरत कमाई लेकिन उनके असली नाम से लोग बेखबर रहे। उनका असली नाम था अख्तर हुसैन रिजवी। मई 1947 में कैफी आजमी ने शौकत से शादी की। शौकत ने कैफी का बहुत साथ दिया। अदाकारा शबाना आजमी कैफी आजमी की बेटी हैं। बता दें कि कैफी आजमी वर्ष 1936 में वह साम्यवादी दल से जुडे। 1943 में साम्यवादी दल ने मुंबई कार्यालय शुरू किया और उन्हें जिम्मेदारी देकर भेजा। यहां आकर कैफी ने उर्दू जर्नल ‘मजदूर मोहल्ला’ का संपादन किया। यहां साहित्यिक संस्कारों वाली शौकत को कैफी के लेखन ने प्रभावित किया और दोनों ने एक होने का फैसला कर दिया।

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Famous poet-lyricist of the Hindi film industry Kaifi Azmi written his first Ghazal at the age of 11
हीर रांझा - फोटो : सोशल मीडिया

‘हीर-रांझा’ ने दिलाई खास पहचान
कैफी आजमी ने कई फिल्मों में गीत लिखे। उन्होंने 'कागज के फूल', 'गर्म हवा', ‘हकीकत’, ‘हीर रांझा’ जैसी कई फिल्मों के लिए काम किया। वक्त ने किया क्या हसीं सितम (कागज के फूल), इक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना (शमा), जीत ही लेंगे बाजी हम तुम (शोला और शबनम), तुम पूछते हो इश्क भला है कि नहीं है (नकली नवाब) जैसे गाने उन्हीं की कलम के उदाहरण हैं। फिल्म हीरा रांझा के गाने मिलो न तुम तो हम घबराए और ये दुनिया ये महफिल को उन्होंने ही लिखा। ‘हीर-रांझा’ कैफी की सिनेमाई कविता कही जा सकती है।

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कैफी आजमी - फोटो : सोशल मीडिया

काम को मिला सम्मान
फिल्मी दुनिया में कैफी को बहुत से सम्मानों से भी नवाजा गया। उनकी रचनाओं में आवारा सजदे, इंकार, आखिरे-शब आदि प्रमुख हैं। कैफी आजमी को भारत का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक अवॉर्ड पद्मश्री मिला था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी अवॉर्ड, 'आवारा सजदे' रचना के लिए साहित्य अकादमी अवॉर्ड फॉर उर्दू, महाराष्ट्र उर्दू अकादमी का स्पेशल अवॉर्ड, सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड, 1998 में उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने ज्ञानेश्वर अवॉर्ड दिया। दिल्ली सरकार और दिल्ली उर्दू अकादमी की तरफ से पहला मिलेनियम अवॉर्ड भी उन्हें मिला। 

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