13 साल पहले अमरोहा के बावनखेड़ी में शबनम नाम की लड़की ने अपने ही घर के सात लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। हत्या की वजह उसका प्रेमी सलीम था। दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे लेकिन घरवाले इस प्यार के खिलाफ थे। और फिर आई 14 अप्रैल 2008 की वो रात जिसे उत्तर प्रदेश के अमरोहा के हसनपुर तहसील के गांव बावनखेड़ी के लोग चाह कर भी नहीं भुला पाते। शबनम देश की पहली महिला हो सकती है जिसे फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। उसे कब फांसी दी जाएगी इसकी तारीख का एलान अभी नहीं हुआ है।
2 of 5
शबनम केस
- फोटो : Youtube
इन दिनों शबनम को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। किसी ने शबनम के फांसी की सजा को सही ठहराया है तो कोई इसके विरोध में है। जज ने फैसला देते समय शबनम के बारे में कहा था कि वह मजबूत दिल और गुर्दे वाली निर्मम लड़की है। यह केस चार दिनों के भीतर सुलझा लिया गया था। इस केस में कब कैसे और क्या हुआ इसे देखने और जानने के लिए यूजर्स अनूप सोनी के क्राइम शो का रुख कर रहे हैं।
3 of 5
शबनम केस
- फोटो : Youtube
जैसे ही शबनम और उसके आशिक को फांसी की सजा सुनाई गई, यूजर्स यूट्यूब पर जाकर अमरोहा मर्डर केस सर्च करने लगे और फिर उनके हाथ लगी वो कहानी, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। इस क्राइम शो में किरदारों के नाम बदल कर नूरी और सलीम कर दिए गए। और लीड किरदार निभाया था सयीम खान और मशहूर मराठी एक्ट्रेस प्रार्थना बेहेरे ने। अगर आपको भी पूरी घटना के बारे में देखना है तो आप यू ट्यूब पर अमरोहा मर्डर केस सर्च कर सकते हैं।
4 of 5
अमरोहा शबनम केस
- फोटो : अमर उजाला
शबनम केस के चर्चा में आने के बाद ये एपिसोड खूब देखा जा रहा है। प्रेम संबंध में अड़चन बने अपनों से नफरत में सात जिंदगियां एक ही रात में खत्म कर दी गईं। जब पुलिस शबनम के घर पहुंची तो परिवार में इकलौती ज़िंदा बची शबनम घर के एक कोने में दहाड़े मार-मार कर रो रही थी। उस रात का ये मंजर इंस्पेक्टर आरपी गुप्ता ने अपनी आंखों से देखा था। शबनम के घर में अगल-बगल में सात कब्रें हैं और दीवारों पर आज भी खून के धब्बे उस खौफनाक हत्याकांड की याद दिलाते हैं। उस गांव के लोग अपनी बच्चियों का नाम शबनम रखने के घबराते हैं।
5 of 5
दोषी शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
14 अप्रैल 2008 की रात को क्या हुआ
बावनखेड़ी गांव में रहने वाले शौकत एक कॉलेज में लेक्चरर थे। उनकी गांव में काफी इज्जत थी। उनका एक बेटा एमबीए तो दूसरा बेटा इंजीनियर था। घर की बड़ी बेटी शबनम अंग्रेजी और भूगोल डबल एमए थी और गांव में ही शिक्षामित्र थी। लेकिन 14/15 अप्रैल की उस दरम्यानी रात ने जैसे सब कुछ तबाह कर दिया। एक रात में हंसता-खेलता परिवार बिखर गया।