सिल्वर स्क्रीन पर 'हेलन' एक ऐसा नाम हैं जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता है। हेलेन को अगर पहली आइटम गर्ल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। भारतीय सिनेमा में आइटम सॉन्ग पर डांस करने की शुरुआत हेलन ने ही की थी। एंग्लो इंडियन हेलन जब तक फिल्मों में रहीं अपना स्टारडम बनाकर रखा। फिल्मों में तो आपने हेलन को खूब देखा होगा लेकिन आज हम आपको निजी जिंदगी की ऐसी असलियत बताएंगे जहां सिर्फ अंधेरा था।
जी हां, हेलन फिल्मी पर्दे पर थिरकती हुई सबका मन मोह लेती थीं। चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाली हेलन की जिंदगी में सिर्फ मायूसी थी। हेलेन का जन्म 21 नवंबर 1938 में बर्मा में हुआ था। उनकी मां बर्मा की थीं। हेलन का एक भाई और एक सौतेली बहन जेनिफर थी। पिता का निधन होने के बाद उनकी मां ने एक ब्रिटिश सैनिक से शादी कर ली।
इसके बाद हेलन ने अपने सौतेले पिता का सरनेम रिचर्डसन अपना लिया। लेकिन वर्ल्ड वॉर II में रिचर्डसन की मौत हो गई। जब जापान ने बर्मा पर कब्जा किया तो हेलन का पूरा परिवार मुंबई की ओर चल दिया। यात्रा के दौरान उन्हें जंगलों और गांवों से गुजरना पड़ा। हेलन की मां और दोनों भाई-बहन भूख से बिलख रहे थे। तब ग्रामीणों ने उन्हें अपने घर पर रखा और खाना दिया।
वहीं पर एक ब्रिटिश सैनिक ने उन्हें मुंबई जाने के लिए गाड़ी, खाना और दवाइयां दी। इस दौरान हेलन की प्रेग्नेंट का मिसकैरेज हो गया। जिस ग्रुप के साथ हेलन का परिवार मुंबई जा रहा था। उनमें से कुछ लोग भुखमरी और कुछ बीमारी के कारण मर गए। मुंबई की मंजिल अभी दूर थी। इसलिए हेलन की मां ने कोलकाता में रुकने फैसला किया। वो वहां पर नर्स का काम करने लगीं।
हेलन और उनके दोनों भाई-बहन को स्कूल भेजा गया। लेकिन मां की सैलरी से घर का खर्च निकालना मुश्किल था। कोलकाता में रहने के दौरान हेलन की मां की मुलाकात कुकु मोरे से हुई जो फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर थीं। हेलन घर चलाने के लिए नौकरी ढूंढ रही थीं। तब कुकु ने हेलन को फिल्मों में कोरस डांसर की नौकरी दिलवाई। हेलन के आते ही कुकु का चार्म फीका पड़ने लगा और हेलन ने अपनी जगह बना ली।