बड़े से बड़े सितारों के गानों को अपनी आवाज देने वाले मन्ना डे को लेकर आत्मकथा में बड़ा खुलासा हुआ है। जानें वो क्यों नहीं बनना चाहते थे संगीतकार ।
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'लागा चुनरी में दाग', 'एक चतुर नार करके श्रृंगार', 'ऐ मेरी जोहरा जबीं' जैसे कई बड़े गानों को अपनी आवाज से अमर बनाने वाले मन्ना डे भारतीय संगीत का एक प्रसिद्ध चेहरा हैं। 60 के दशक में वो संगीतकार के रूप में निर्देशों की पहली पसंद हुआ करते थे।
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बड़े से बड़े सितारों के गानों को अपनी आवाज देने वाले मन्ना डे पहले संगीतकार नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने इस बात का जिक्र अपनी आत्म कथा 'यादें जी उठीं' में किया है। मन्ना डे लिखते हैं कि मैं एक गायक हूं और मेरा पूरा जीवन संगीत को ही समर्पित रह है। मेरे लिए संगीत ही ईश्वर है- मेरी प्रेरणा और ज्ञान का एकमात्र स्रोत। मैं संगीत के लिए जीता हूं। हालांकि मैंने बचपन अपने बचपन का ज्यादातर समय दोस्तों के साथ लड़ने-झगड़ने में बिताया।
वो लिखते हैं, 'उस समय संगीत में मेरी अभिरुचि नहीं थी। लेकिन हमारे कुल के संगीतमय वातावरण ने मुझे गहरा प्रभावित किया और मुझ जैसे शरारती उद्दंड बच्चे को एक संगीतकार में तब्दील कर दिया। इसी से मेरे अंदर संगीत में निपुण होने की इच्छा जाग्रत हुई। '
मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। उन्होने स्कॉटिश चर्च कॉलेजिएट स्कूल, स्कॉटिश चर्च कॉलेज तथा विद्यासागर कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। 1942 में मन्ना पहली बार अपने चाचा प्रसिद्ध संगीतकार कृष्णाचंद्र डे के साथ मुंबई आए और अपनी संगीत यात्रा आरंभ की।