'छोड़ दो मुझे भगवान के लिए छोड़ दो..' फिल्मों में ये डायलॉग बहुत पसंद था इस अभिनेता को, जानिए क्यों

प्रतीक्षा सिंह राणावत Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Fri, 29 May 2020 02:34 AM IST
इतिहास का पर्दा- भगवान दादा
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हमेशा से कहा जाता रहा है कि बॉलीवुड में काम करने के लिए हैंडसम, खूबसूरत और जवान होना बेहद जरूरी है। लेकिन ऐसे कई अभिनेता हैं जिन्होंने इस बात को गलत साबित किया है। ये बात सिर्फ आज की ही नहीं है। बल्कि पहले के समय में भी ऐसे अभिनेता मौजूद रहे हैं जिन्होंने इस बात को साबित किया है। ऐसे ही एक अभिनेता थे भगवान दादा।
Bhagwan Dada
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भगवान दादा ना ही चेहरे से ज्यादा खूबसूरत थे, ना हैंडसम और ना ही जवान। इस बात को वो खुद भी मानते थे। लेकिन फिर भी उन्होंने एक से बढ़कर एक खूबसूरत अभिनेत्रियों के साथ काम किया है। इसे भगवान दादा खुद भी अपनी किस्मत ही मानते थे। भगवान दादा कॉमेडी के बेताज बादशाह थे। केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि वो असल जिंदगी में भी एकदम मस्त मौला किस्म के इंसान थे। इस बात का अंदाजा उनके एक छोटे से किस्से से ही लगाया जा सकता है।
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भगवान दादा
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भगवान दादा से एक बार पूछा गया था कि उन्हें अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा खुशी कब होती है या हुई है? इस सवाल के जवाब में भगवान दादा ने एकदम मस्त मौला अंदाज में जवाब दिया। भगवान दादा ने जवाब में कहा, 'मुझे सबसे ज्यादा खुशी उस वक्त होती है जिस वक्त कोई विलेन फिल्म में किसी हीरोइन की इज्जत लूटने की कोशिश करता है। और वो चिल्लाती है "छोड़ो मुझे, छोड़ो मुझे, भगवान के लिए मुझे छोड़ दो।" जब मैं ये सुनता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।'
भगवान दादा
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गौरतलब है कि भगवान दादा का असली नाम भगवान आभाजी पालव था। उन्हें शुरू से ही फिल्मों का काफी शौक था। उन्होंने मूक सिनेमा के दौर में फिल्म 'क्रिमिनल' से डेब्यू किया था। शुरुआती दौर में वो बहुत गरीब थे और मुंबई की एक चॉल में रहते थे। एक्टिंग के साथ ही उन्होंने फिल्में प्रोड्यूस करना भी शुरू कर दिया। भगवान दादा ने थोड़े पैसे जोड़कर और थोड़े दोस्तों से लेकर साल 1951 में फिल्म 'अलबेला' का निर्माण किया। ये फिल्म सुपरहिट हुई और इसके बाद उनके ऊपर मानो पैसे की बारिश होने लगी।
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भगवान दादा
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इसके बाद भगवान दादा ने समंदर के किनारे जुहू पर एक बंगला ले लिया। एक ही नहीं बल्कि कई बंगले उन्होंने एक के बाद ले लिए। बड़ी-बड़ी गाड़ियां ले लीं। लेकिन इसके साथ-साथ उन्हें कुछ बुरी लत लग गईं। दारू और जुए की बुरी आदत की वजह से उन्होंने सारा पैसा गवां दिया। इसी दौर में उन्होंने एक फिल्म और बना दी 'झमेला'। लेकिन अफसोस कि ये फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद उनकी गाड़ियां बंगले सब बिक गए। अंत में उनकी मौत उसी चॉल में हुई जहां से उन्होंने शुरुआत की थी।

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