'बाहुबली 2' भारतीय सिनेमा की एक ऐसी फिल्म बन गई है जिसने सारे रिकॉर्ड धवस्त करते हुए ना सिर्फ जबरदस्त कमाई की बल्कि कई करिश्माई रिकॉर्ड भी बनाए हैं, लेकिन इसके साथ ही ये फिल्म एक ऐसी फिल्म के तौर पर भी उभरकर सामने आई है जिसमें मां का जबरदस्त किरदार दिखाया गया।
कहा जाता है कि भगवान एक साथ हर जगह नहीं मिल सकते और इसलिए उसनें मां को बनाया ताकि उनके रूप में वो अपने बच्चों और परिवार का ख्याल रख सके। मां जैसा बलिदान देने वाला और उन जैसा निस्वार्थ प्रेम करने वाला इस दुनिया में कोई नहीं। 'बाहुबली 2' में भी मां के किरदार की इसी खूबी को दिखाया।
न्याय, प्रेम और सच की जीत के लिए बाहुबली की मां अपने बेटों का बलिदान देने से भी नहीं चूकती। हालांकि उसकी औलाद उसके इसी प्रेम का फायदा उठाने की कोशिश करती है और षड्यंत्र रचती है, लेकिन कहते हैं ना कि मां किसी के आगे मजबूर नहीं होती लेकिन अपनी औलाद के सामने वो झुक जाती है।
अपने एक बेटे को वो राजपाट सौंपती है पर कहीं उसका दूसरा बेटा बुरा ना मान जाए इसलिए शिवगामी दूसरे बेटे को उसके भोग के लिए कई अद्भुत चीजें मंगवाकर देती है। वो दोनों बेटे उसी के हैं इसलिए वो उनके लिए पक्षपाती भी नहीं हो सकती, लेकिन सत्ता और लोभ के लालच में एक बेटा भल्लालदेव अपनी मां के इसी निस्वार्थ प्रेम को देख नहीं पाता और ऐसा षड्यंत्र रचता कि वो फंस जाती है।
बेटे भल्लालदेव के षड्यंत्र में फंसकर या यूं कहें कि ये सोचकर कि मेरे एक बेटे को कुछ नहीं मिला जबकि एक राजा बन गया, वो वैसा ही करती जाती है जैसा कि उससे भल्लालदेव करने को कहता है। भल्लालदेव की वजह से शिवगामी की आंखों पर क्रोध की ऐसी पट्टी बंध जाती है कि वो सही क्या है और गलत क्या, ये देख ही नहीं पाती...और फिर वो एक बेटे के लिए अपने दूसरे बेटे यानि बाहुबली को कुर्बान कर देती है।