बीते तीन दशकों से म्यूजिक इंडस्ट्री में अपना दबदबा कायम रखने वाले अनु मलिक इन दिनों सोनी टीवी पर सिंगिंग रियल्टी शो ‘इंडियन आइडल 10’ में बतौर जज दिखाई दे रहे हैं। अनु मलिक आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं उन्होंने आज जो कुछ भी हासिल किया है अपने दम पर किया है। 1992 में आई फिल्म 'बाजीगर' ने उन्हें रातोंरात युवा दिलों की धड़कन बना दिया। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलता ने उनके कदम चूमे।
अनु हमेशा अपने निजी जीवन पर बात करने से बचते आए हैं लेकिन ‘इंडियन आइडल 10’ पर उन्होंने शुरुआती दिनों की कहानी साझा की] जिस व्यक्ति ने हिंदी सिनेमा को इतने बेहतरीन गाने दिए, उन्होंने बताया किस तरह उन्होंने अपने शुरुआती दिन काटे थे।
अन्य प्रतिभाशाली गायकों की तरह अनु भी काम की तलाश में मुम्बई आए थे, संगीत में कुछ नया और अच्छा करने के लिए। उन्होंने कहा स्ट्रगल के दिनों में उनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे। मगर उन्हें अपनी काबीलियत पर यकीन था कि एक न एक दिन वह जरूर कुछ अच्छा करेंगे] इसलिए उन्होंने एक दिन शो देखने के लिए अपने पिता की जेब से 5 रुपये चुरा लिए थे।
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अनु मलिक और उनका परिवार
- फोटो : Koimoi
अनु ने बताया आज वह जो कुछ भी हैं इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत है। अनु ने ये भी कहा कि वो कभी पैसे नहीं चुराना चाहते थे लेकिन उस चोरी ने ही उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। अनु मलिक को एक बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला है। फिल्म 'रिफ्यूजी' में बेहतरीन संगीत के लिए उन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया था।