सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में गरिमा के साथ मौत को मौलिक अधिकार ठहराते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु और लिविंग विल को कानूनन वैध ठहरा दिया है। जैसे ही यह फैसला आया, मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने मामले पर बड़ी टिप्पणी दे डाली।
संजय लीला भंसाली कहा, 'मुझे याद है, जब मैंने फिल्म गुजारिश बनाई थी तब काफी हो-हल्ला मचा था।' इच्छामुत्यु पर अपनी राय देते हुए संजय लीला भंसाली ने कहा, 'जब मैंने किसी जानकार को ऐसी हालत में देखा था तो एहसास हुआ था कि जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता है जब अंत ही एकमात्र हल होता है।'
संजय लीला भंसाली ने साल 2010 में फिल्म 'गुजारिश' बनाई की जिसमें 'इच्छामृत्यु' की मांग को जायज ठहराया गया था। यह फिल्म एक ऐसे शख्स (इथन) की कहानी है जो 14 सालों से 'क्वाड्रोप्लेजिया' नामक बीमारी से पीड़ित है। वह सिर्फ बोल सकता है, उसके शरीर का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त होता है। फिल्म में ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय लीड रोल में नजर आए थे।
फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली ने बताया कि जब वह अपनी फिल्म 'गुजारिश' के लिए रिसर्च कर रहे थे तो उन्होंने रेफ्रेंस के लिए कोई फिल्म नहीं देखी थी। उन्होंने बताया, 'मैं नहीं चाहता था कि मेरी फिल्म किसी और के काम से प्रभावित हो।' गौरतलब है कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ठीक न होने की कगार पर पहुंचे मरीज की लिविंग विल को मान्यता देते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु को लेकर दिशानिर्देश तय किए।