देशभक्ति और भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बनी एक फिल्म ऐसी भी थी जिसके रिलीज होने के बाद निर्देशक को जान से मारने की धमकी मिल गई थी। जिसके बाद पुलिस को फिल्म के निर्देशक को सुरक्षा मुहैया करानी पड़ी थी। इस फिल्म के रिलीज के कुछ दिन बाद ही निर्देशक के साथ चौबीस घंटे उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी मौजूद रहते थे। उनको अपने परिवार के साथ यात्रा करने की भी अनुमति नहीं दी गई थी। निर्देशक ने ऐसे वक्त को बेहद मुश्किल वक्त बताते हुए कहा था कि इस फिल्म की वजह से वो अपने परिवार से दूर हो गये हैं।
हकीकत: वो फिल्म जिसे बनाने के बाद निर्देशक को मिली जान से मारने की धमकी, प्रधानमंत्री ने कहा- जरूर बननी चाहिए
जे.पी दत्ता की पहली फिल्म ‘सरहद’ थी जो कि कभी पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने बॉर्डर फिल्म बनाने की सोची। हालांकि, इसका हिंदी अर्थ भी सरहद ही होता है। फिल्म बॉर्डर 1971 के भारत और पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी थी। यह एक ऐसी फिल्म थी जिसने जे.पी दत्ता के करियर को नया मुकाम दिया और उनको तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
जे.पी दत्ता को इस फिल्म को बनाने का आइडिया अपने भाई से मिला था। उनके भाई दीपक 1971 के भारत और पाकिस्तान युद्ध में इंडियन एयरफोर्स का हिस्सा थे। जब वो युद्ध से लौटकर आए तो उन्होंने अपने भाई को कहानी सुनाई, तभी जे.पी दत्ता के मन में इस विषय पर फिल्म बनाने का विचार आया।
इस फिल्म में विंग कमांडर एंडी बाजवा का किरदार निर्देशक के भाई दीपक से ही प्रेरित था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर-डुपर हिट रही थी। इस फिल्म में उस वक्त के सभी बड़े स्टार्स ने काम किया था। इस फिल्म के लिए जे.पी दत्ता ने सलमान खान, आमिर खान, और अक्षय कुमार को भी अप्रोच किया था।
इस फिल्म को लेकर जे.पी दत्ता ने तात्कालिक प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव से भी संपर्क किया था। बॉर्डर फिल्म की कहानी सुनने के बाद नरसिम्हा राव का कहना था कि ये फिल्म जरूर बननी चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी इस फिल्म में सैनिकों के रोल में किसी जूनियर कलाकार को नहीं रखा गया था। सैनिक और हथियार वास्तविक थे। रिलीज के बाद से अब तक यह फिल्म देशभक्ति फिल्मों में सबसे ऊपरी पायदान पर है।