हिंदी सिनेमा निरंतर आगे बढ़ रहा है। न सिर्फ अब हीरो की भूमिका ही लोगों को पसंद आ रही है, बल्कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं। हालांकि, इन सबके बावजूद भी अब तक मनोरंजन जगत में अभिनेता और अभिनेत्री की फीस समान नहीं हो चुकी हैं। इस वेतन असमानता पर कई दफा सवाल खड़े किए जा चुके हैं। कई हसीनाओं को समान वेतन पर जोर देते देखा गया है। आइए इन अभिनेत्रियों की सूची पर गौर फरमा लेते हैं-
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रवीना टंडन
- फोटो : सोशल मीडिया
रवीना टंडन ने हालिया इंटरव्यू में वेतन असमानता पर बात की। अभिनेत्री ने 90 के दशक के दौर को याद करते हुए कहा कि उन दिनों अभिनेत्रियों को ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे। एक हीरो एक फिल्म से जितना कमा लेता था, एक अभिनेत्री उतना पैसा 15 से 16 फिल्मों में काम करने के बाद ही कमा पाती थी। उन्होंने स्टीरियोटाइपिंग का कारण बताते हुए कहा कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि हमें अपने को स्थापित करने में वक्त लगा। जब वे फिल्में रिलीज होने लगती थी, जिनमें छह सुपरहिट गाने और वही एक जैसे सीन होते थे तो इस तरह की और भी फिल्मों में काम मिलने लगता था। ऐसी स्थिति में आंख मूंदकर उन फिल्मों को साइन कर लिया जाता था। करियर प्लानिंग नाम की कोई चीज थी ही नहीं।
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काजोल
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बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल भी वेतन असमानता पर बात कर चुकी हैं। अभिनेत्री का कहना है, 'मैं समानता पर अधिक ध्यान नहीं देती। मेरा मानना है कि इसका संबंध इंडस्ट्री की व्यवस्था से है।' उन्होंने बताया कि वेतन अंतर महिला-केंद्रित फिल्मों के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया और वे इसे कैसे स्वीकार करते हैं, इस पर निर्भर करता है। काजोल के मुताबिक, 'पिछले कुछ वर्षों में दर्शक बदल रहे हैं। धीरे-धीरे ही सही, चीजें बेहतर हो रही हैं। फिल्म निर्माता हर तरह के विषयों पर फिल्में बना रहे हैं, और काम कर रहे हैं। दर्शकों को चाहिए कि एक महिला प्रधान फिल्म को 200-300 करोड़ रुपये कमाने दें।'
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जूही चावला
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जूही चावला ने कहा था कि वेतन अंतर पुरुष प्रधान समाज का परिणाम है। जूही के शब्दों में, 'फिल्में आमतौर पर अपने हीरो के नाम से जानी जाती हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि महिलाओं की निर्णायक भूमिका नहीं है, लेकिन उनकी भूमिका बहुत कम है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, और यह कुछ ऐसा है जिसे आप स्वीकार करना सीखते हैं।'
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विद्या बालन
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विद्या बालन ने भी इस बारे में बात की और कहा कि उनका मानना है कि एक दिन महिला केंद्रित फिल्में होंगी, और हमें इसका समर्थन करने के लिए किसी पुरुष अभिनेता की जरूरत नहीं होगी। आइए इसका सामना करें, यह सिनेमा का व्यवसाय है, और सौभाग्य से या दुर्भाग्य से अब तक लोग हमेशा कहते थे कि अक्षय कुमार की फिल्म देखने जा रहा हूं। आज भी, लोग कहते हैं, सलमान खान की फिल्म, शाहरुख खान की फिल्म, आमिर खान की फिल्म। जब महिलाएं उन फिल्मों में समान रूप से प्रमुख भूमिकाएं निभाना शुरू कर देंगी, तो वे ऐसा करने में सक्षम होंगी, मुझे लगता है... जब दर्शक उन्हें समान रूप से देखने आएंगे और यह मायने रखता है कि नायिका कौन है।'