देश के प्रसिद्ध व महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे। बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) में उनका इलाज चल रहा था।
लेकिन वशिष्ठ नारायण सिंह की कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाएगी। देश-दुनिया में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। इसका कारण है उनका गणित का ज्ञान। उन्होंने दुनिया के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन को भी चुनौती दे डाली थी। उनके बारे में आगे पढ़ें...
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
वशिष्ठ नारायण सिंह... युवावस्था में वह 'वैज्ञानिक जी' के नाम से मशहूर थे। करीब 40 साल से वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। बिहार के पटना स्थित एक अपार्टमेंट में गुमनामी का जीवन बिता रहे थे। किताबें, कॉपियां और पेंसिल ही उनके सबसे अच्छे दोस्त रहे।
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो)
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पटना साइंस कॉलेज से पढ़ने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह गणित में कुछ गलत पढ़ाने पर अपने शिक्षक को भी टोक देते थे। इस बात का पता जब कॉलेज प्राचार्य को चला था तो उन्होंने उनकी अलग से परीक्षा ली थी। इसमें वशिष्ठ नारायण सिंह ने सभी अकादमिक रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो)
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- पटना साइंस कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही वशिष्ठ नारायण कैलिफोर्निया विवि के प्रो. जॉन कैली की नजरों में आए। कैली वशिष्ठ की प्रतिभा पहचान गए और फिर 1965 में वशिष्ठ नारायण अमेरिका चले गए।
- 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और फिर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बने।
- उन्होंने नासा (NASA) में भी काम किया। लेकिन मन न लगने पर 1971 में वापस भारत लौट आए।
- यहां आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की।
- वशिष्ठ नारायण सिंह ने आइंस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी।
- उनके बारे में एक और कहानी बड़ी मशहूर है। जब नासा अपोलो की लॉन्चिंग कर रहा था, तब वशिष्ठ नारायण भी वहां मौजूद थे। लॉन्चिंग से ठीक पहले 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए थे। इस बीच वशिष्ठ नारायण ने अपना कैलकुलेशन जारी रखा। जब कंप्यूटर ठीक हुए, तो वशिष्ठ और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही था।
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