रूस-यूक्रेन के बीच जंग के दौरान जान बचाकर स्वदेश लौटे हजारों भारतीय छात्र अब एक बार फिर दहशत के साये में हैं। भारतीय छात्रों के सामने अभी तक एक चुनौती थी वे पहले अपनी जान बचाएं, जो उन्होंने स्वदेश लौटकर बचा ली। फिर दूसरी चुनौती सामने आई कि वे भारत में रहकर यूक्रेन के संस्थानों से नियमित पढ़ाई कैसे करें और अपना करिअर कैसे बचाएं? वे इससे जूझ ही रहे थे लेकिन अब एक और चुनौती दस्तक देने वाली है। वह है जंग के हालात के बीच पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस यूक्रेन जाने की।
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यूक्रेन से वापस लौटे भारतीय छात्र
- फोटो : ANI
सितंबर से ऑफलाइन क्लास और अक्तूबर में अनिवार्य परीक्षा
दरअसल, लगभग छह महीने पहले जब रूसी सेना ने यूक्रेन पर हमला किया, तो वहां के मेडिकल कॉलेजों में नामांकित भारतीय छात्रों के लिए जान बचाना बड़ी चुनौती थी और उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर आना पड़ा। अब जो चुनौती है वह से वापस से ऑफलाइन कक्षाओं और परीक्षाओं को शुरू करना। युद्धग्रस्त यूक्रेन की राजधानी कीव में कुछ विश्वविद्यालयों ने छात्रों को सितंबर से ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने और अक्तूबर में ऑफलाइन मोड में आयोजित होने वाली अनिवार्य परीक्षा क्रोक में शामिल होने को लेकर सूचित किया है।
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Ukraine Returnee Medical Students
- फोटो : एएनआई
KROK परीक्षा के लिए उपस्थित होना जरूरी
यूक्रेनी मानदंडों के अनुसार, अपने अध्ययन के तीसरे वर्ष में, चिकित्सा, दंत चिकित्सा और फार्मेसी के छात्रों को KROK-1 परीक्षा के लिए उपस्थित होना जरूरी होता है। वहीं, अंतिम वर्ष पूरा होने के बाद, डॉक्टर या फार्मासिस्ट होने के लिए सर्टिफिकेशन के लिए छात्रों को राज्य की लाइसेंसिंग परीक्षा KROK-2 के लिए बैठना पड़ता है। छह महीने से ऑनलाइन कक्षाओं को अटेंड कर रही कीव स्थित तरास शेवचेंको नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी की 20 वर्षीय छात्रा आशना पंडित विश्वविद्यालय के संदेश को पढ़ कर चौंक गई। उसमें कहा गया है, हम एक सितंबर से ऑफलाइन कक्षाएं आयोजित करने के लिए तैयार हैं। आपकी सुरक्षा की गारंटी है।
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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कीव में स्थिति सामान्य है लेकिन कब तक?
नोएडा निवासी आशना और उसका जुड़वां भाई अंश, जो चौथे वर्ष के मेडिकल छात्र हैं, अब इस बात को लेकर दहशत में हैं कि आगे क्या किया जाए। आशना ने बताया कि यूक्रेन लौटने का विचार जबकि युद्ध अभी भी जारी है, बहुत डरावना है। मैंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से बात की, उन्होंने कहा कि कीव में स्थिति सामान्य है लेकिन कब तक? यह विश्वविद्यालय ने अभी भी स्पष्ट नहीं किया।
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यूक्रेन से भारतीय छात्र रवाना
- फोटो : ANI
भारत में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं
आशना ने बताया कि भले ही हम में से कुछ ऑनलाइन कक्षाओं के लिए सहमत हों, लेकिन भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं देता। इससे पहले, विश्वविद्यालय ने हमें बताया था कि वे पोलैंड या जॉर्जिया में हमारे लिए व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन यह अमल में नहीं आया। आशना ने बताया कि भले ही छात्र कक्षाओं के लिए यूक्रेन न जाए फिर भी उन्हें क्रोक के लिए जाना होगा क्योंकि यह एक योग्यता परीक्षा है जिससे उन्हें चौथे वर्ष में पदोन्नत किया जाना है।
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