पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। मंगलवार, 6 अगस्त की रात ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स), नई दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। बहुमुखी प्रतिभा की धनी सर्वमान्य नेता को उनके व्यक्तित्व, देशभक्ति, सूझबूझ और कार्यों के लिए देश हमेशा याद रखेगा।
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सुषमा स्वराजः ऐसे तय किया कॉलेज की छात्र नेता से भारत की विदेश मंत्री तक का सफर
Wed, 07 Aug 2019 12:43 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया
Updated Wed, 07 Aug 2019 12:43 PM IST
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सुषमा स्वराज
- फोटो : अमर उजाला
Sushma Swaraj with Geeta
- फोटो : PTI
कॉलेज की शिक्षा
- सुषमा ने हरियाणा के अंबाला कैंट स्थित सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और पॉलिटिकल साइंस में बैचलर डिग्री ली।
- उसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय में लॉ की डिग्री के लिए दाखिला लिया।
- इस दौरान हरियाणा के भाषा विभाग द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में सुषमा ने लगातार तीन वर्षों तक 'बेस्ट हिंदी स्पीकर' का खिताब जीता।
सुषमा स्वराज
- फोटो : ANI
करियर
- लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 1973 में वकालत शुरू की। तब वह महज 21 साल की थीं।
- हालांकि सुषमा ने 1970 के दशक में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साछ जुड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भी कर दी थी।
- जेपी मूवमेंट में भी सुषमा की सक्रिय भागीदारी रही। फिर इमरजेंसी खत्म होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की।
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sushma swaraj
राजनीतिक करियर
- सुषमा 1977 से 1982 तक और फिर 1987 से 1990 तक हरियाणा विधानसभा की सदस्य रहीं। जुलाई 1977 में सुषमा जनता पार्टी में राज्य कैबिनेट मंत्री बनीं थीं। तब उनकी उम्र 25 वर्ष थी।
- फिर 1987 से लेकर 1990 तक वह हरियाणा की शिक्षा मंत्री रहीं।
- 1979 में 27 साल की उम्र में वह हरियाणा में जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष बनी थीं।
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सुषमा स्वराज
- फोटो : PTI
दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में सुषमा
- 1996 में सुषमा स्वराज दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया और 13 अक्टूबर, 1998 को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
- हालांकि दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल सिर्फ 53 दिनों का रहा। 3 दिसंबर 1998 को उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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