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क्या है IPC की धारा 279 और 337, जो एक लापरवाही पर दिला सकती है सजा

Mon, 20 Jan 2020 09:25 AM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 20 Jan 2020 09:25 AM IST
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Shabana Azmi accident case update, What is section 279 and 337 of IPC charged Shabana Azmi driver

Shabana Azmi Accident and FIR on Driver: शनिवार, 18 जनवरी 2020 को बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई थी। जिसके बाद अब ट्रक ड्राइवर ने शबाना आजमी के ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। हालांकि पुलिस ने अभी उनके ड्राइवर को गिरफ्तार नहीं किया है। दुर्घटना के वक्त कार में शबाना आजमी और जावेद अख्तर दोनों मौजूद थे। 

Shabana Azmi accident case update, What is section 279 and 337 of IPC charged Shabana Azmi driver

ट्रक ड्राइवर ने आरोप लगाया है कि कार ड्राइवर की लापरवाही के साथ गाड़ी चलाने (Rash Driving) के कारण यह दुर्घटना हुई है। बता दें कि एक्सीडेंट में शबाना आजमी को गंभीर रूप से चोटें आई हैं।  जबकि जावेद अख्तर सुरक्षित हैं। शबाना आजमी इस समय मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में है। यहां उनका इलाज अभी जारी है। 

Shabana Azmi accident case update, What is section 279 and 337 of IPC charged Shabana Azmi driver

समाचार एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी है कि पुलिस ने ट्रक ड्राइवर की शिकायत पर मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। ड्राइवर के खिलाफ मोटर व्हीक्ल एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC - Indian Penal Code) की धारा 279 और 337 के तहत मामला दर्ज किया है। आज हम आपको बताएंगे इन धाराओं के बारे में, जो आपके भी काम आ सकती हैं। इन धाराओं के तहत किसी के खिलाफ क्या मामले दर्ज हो सकते हैं? दोषी को कितनी सजा मिलती है? इन धाराओं के अंतर्गत किस अदालत में केस दर्ज होता है? जमानत मिलती है या नहीं?  

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धारा 279

  • भारत दंड संहिता की धारा 279 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी वाहन को एक सार्वजनिक मार्ग पर किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही से चलाता है, जिससे मानव जीवन को कोई संकट या किसी व्यक्ति को चोट या आघात पहुंचा सकता है, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाता है।
  • इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक के कारावास की सजा हो सकती है। इसके साथ ही एक हजार रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है या दोनो दंड दिए जा सकते हैं। 
  • यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। इस अपराध में समझौता नहीं किया जा सकता।

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धारा 337

  • भारत दंड संहिता की धारा 337 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के उतावलेपन या उपेक्षा के चलते किसी कार्य द्वारा किसी मानव जीवन या किसी कि व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा या चोट पहुंचती है, तो उस व्यक्ति पर इस धारा के अंतर्गत मुकदमा चलता है। 
  • इस मामले में दोषी पाए गए व्यक्ति को छह महीने के कारावास या पांच सौ रुपये के आर्थिक दंड या दोनों का प्रावधान है।
  • यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है, यह मामला किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।  

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