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क्या है NIA कानून, जिसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग कर रही है कांग्रेस सरकार

Sat, 18 Jan 2020 03:37 PM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Mohit Mudgal Updated Sat, 18 Jan 2020 03:37 PM IST
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NIA ACT, national investigation agency act 2008, p chidambaram , 26 11 mumbai terrorist attack
nia - फोटो : file photo

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 के खिलाफ याचिका दायर की है। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि यह अधिनियम संविधान का उल्लंघन करता है। अपने सिविल सूट में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि एनआईए का राज्य पुलिस मामलों में कोई अधिकार नहीं है। 

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बता दें कि ये हाल ही में ये ऐसा दूसरा मामला है जब किसी राज्य सरकार ने अनुच्छेद 131 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए किसी कानून को चुनौती दी हो। मंगलवार को केरल सरकार ने नागरिकता अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 
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इस कानून के अंतर्गत भारत की सबसे अहम आतंकवाद विरोधी एजेंसी एनआईए काम करती है। यह कानून तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम द्वारा 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद संसद में लाया गया। उस समय बहुत कम विरोध के साथ यह कानून पास हो गया था।

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क्या है एनआईए अधिनियम, 2008?

NIA ACT, national investigation agency act 2008, p chidambaram , 26 11 mumbai terrorist attack
  • इस अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सहीं मायनों में अमेरिका की एफबीआई (FBI) की तर्ज पर फेडरल एजेंसी बनाया गया। इस कानून के साथ ही एनआईए की शक्तियां, सीबीआई से भी अधिक हो गई। 
  • एनआईए कानून ने एजेंसी को आतंकवाद से जुड़ें मामलों में भारत के किसी भी इलाके में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने, राज्य सरकार द्वारा बिना आज्ञा के राज्य में प्रवेश और संदिग्ध व्यक्ति की जांच और गिरफ्तारी से जुड़े अधिकार दिए।   
  • अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि यह कानून संविधान की भावना से अलग और संसद की विधायी क्षमता से परे है। राज्य के अनुसार, एनआईए अधिनियम, 2008 केंद्र को जांच के लिए एजेंसी बनाने के अधिकार देता है, जबकि यह राज्य पुलिस का काम है। संविधान की सातंवी अनुसूची में पुलिस राज्य सरकार का विषय है। 
  • याचिका में कहा गया है कि इस अधिनियम द्वारा पुलिस जांच का अधिकार राज्य से छिन कर मनमाने तरीके से केंद्र सरकार और एजेंसी को दे दिया गया है। इस कानून के प्रावधान राज्य और केंद्र सरकार के बीच किसी भी तरह के समन्वय और सहमति के लिए कोई भी जगह नहीं छोड़ते। यह भावना संविधान द्वारा राज्य की संप्रभुता की सोच के पूरी तरह खिलाफ है। 

इन प्रावधानों पर है आपत्ति

NIA ACT, national investigation agency act 2008, p chidambaram , 26 11 mumbai terrorist attack
छापेमारी के दौरान एनआईए की टीम। - फोटो : amar ujala

राज्य को अधिनियम के सेक्शन 6(4), 6(6),7,8 और 10 के प्रावधानों पर भी आपत्ति है।

  • सेक्शन - 6(4):  के अनुसार अगर केंद्र सरकार की राय में कोई अपराध, अनुसूचित अपराध के अंतर्गत आता है तो यह एजेंसी द्वारा जांच किए जाने के लिए एक उपयुक्त मामला है।यही एजेंसी को उक्त अपराध की जांच करने का निर्देश है।

 

  • सेक्शन 6(6): के अनुसार कोई भी निर्देश जो सब सेक्शन(4) और सब सेक्शन (5) के अंतर्गत दिया गया है। उसमें राज्य और राज्य सरकार का कोई पुलिस अधिकारी अपराध की जांच आगे नहीं करेगा और संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड एजेंसी को सौंप देगा। 

 

  • सेक्शन- 7: जांच राज्य सरकार को सौंपने की शक्तियां:
  • इस अधिनियम के अंतर्गत एजेंसी जब किसी अपराध की जांच कर रही होती हो तो :
  • यदि आवश्यक हो तो राज्य सरकार से इसमे शामिल होने की अपील कर सकती है। 
  • केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति के बाद, मामले को जांच राज्य सरकार को सौंप सकती है। 

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  • सेक्शन-8 : जुड़े हुए अपराधों को जांच करने की शक्तियां
  • इस सेक्शन में कहा गया है कि अगर एजेंसी किसी एक अनुसूचित अपराध की जांच कर रही है, तो वह साथ में अपराधी द्वारा किए अन्य किसी मामले की जांच भी कर सकती है, अगर अन्य किसी अपराध का अनुसूचित अपराध के साथ कोई संबंध हो। 

 

साल 2019 में हुए ये बदलाव

NIA ACT, national investigation agency act 2008, p chidambaram , 26 11 mumbai terrorist attack
  • साल 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम के अंतर्गत एजेंसी द्वारा जांच किए जाने वाले मामलों के दायरे को बढ़ाया गया। एजेंसी अब मानव तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री, साइबर आतंकवाद, और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत भी अपराधों की जांच कर सकता है। 
  • इस संशोधन ने केंद्र सरकार को एनआईए ट्रायल के लिए सत्र अदालत को विशेष अदालत नामित करने की भी शक्तियां दी। 
  • साल 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम भी पारित हुआ। यह अधिनियम किसी भी एनआईए अधिकारी बिना राज्य के डीजीपी से पूर्व अनुमति के छापा मारने और आतंकवाद से संबंधित संपत्ति को जब्त करने की शक्तियां प्रदान करता है। इस कानून के तहत जांच अधिकारी को केवल एनआई के महानिदेशक से अनुमति की जरूरत होती है। 

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