किसी शख्स का जादू अगर अब तक लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है तो वो है इंडिया का नन्हा लॉयन यानी सनी पवार। नाम तो आपने सुना ही होगा। देव पटेल और निकोल किडमन के साथ हॉलीवुड फिल्म 'लॉयन' में काम करने वाले सनी, अपनी पहली ही फिल्म से काफी लोकप्रिय हो गए हैं। उनकी एक्टिंग के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे मुंबई की झुग्गियों में से निकलकर यह बच्चा पहुंचा हॉलीवुड की गलियों में। पढ़ते हैं इससे संबंधित जानकारी अगली स्लाइड में...
{"_id":"5c71388cbdec224df422e980","slug":"sarkari-naukri-success-story-of-oscar-nominated-film-lion-know-more-details","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मुंबई की झोपड़पट्टी से ऐसे तय किया हॉलीवुड तक का सफर, कहते हैं इसे इंडिया का 'LION'","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
मुंबई की झोपड़पट्टी से ऐसे तय किया हॉलीवुड तक का सफर, कहते हैं इसे इंडिया का 'LION'
Sun, 24 Feb 2019 02:14 PM IST
विजय जैन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 24 Feb 2019 02:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सनी पवार मुंबई की झोपड़पट्टी में अपने मां-बाप और दो छोटे भाई-बहनों के साथ रहता है। स्लम की हालत ऐसी है कि कई लोग मोहल्ले में बना एक ही बाथरुम इस्तेमाल करते हैं। सनी को जब फिल्म ऑफर हुई तब वह केवल छह साल का बच्चा था।
स्लम में रहने वाले बच्चे किसी बड़े स्कूल में तो जा नहीं पाते, लिहाजा सनी कितना पढ़ा और किस स्कूल में पढ़ा, इसकी जानकारी जुटाना आसान नहीं था।
स्लम में रहने वाले बच्चे किसी बड़े स्कूल में तो जा नहीं पाते, लिहाजा सनी कितना पढ़ा और किस स्कूल में पढ़ा, इसकी जानकारी जुटाना आसान नहीं था।
जो बच्चा अंग्रेजी ना बोल पाता हो वो निकोल किडमेन के साथ इंगलिश फिल्म करे, अचंभा सा होता है ना। लेकिन सनी ने मेहनत की और साफ हिंदी बोलनी सीखी, रही बात अंग्रेजी की तो उसके साथ एक ट्रांसलेटर रखा गया जो हर जगह उसकी बात को अंग्रेजी में कहता है।
सनी उन दो हजार बच्चों में शामिल थे जिन्हें फिल्म के ऑडिशन के लिए चुना गया था। लेकिन सनी इस रोल के लिए फाइनल नहीं हुए थे।
सनी को ये रोल भी एक संयोग से मिला। जब फाइनल हुए बच्चे ने एन वक्त पर बैकआउट कर लिया तो निर्देशक का ध्यान सनी की तरफ गया और सनी लाइमलाइट में आ गया।
सनी उन दो हजार बच्चों में शामिल थे जिन्हें फिल्म के ऑडिशन के लिए चुना गया था। लेकिन सनी इस रोल के लिए फाइनल नहीं हुए थे।
सनी को ये रोल भी एक संयोग से मिला। जब फाइनल हुए बच्चे ने एन वक्त पर बैकआउट कर लिया तो निर्देशक का ध्यान सनी की तरफ गया और सनी लाइमलाइट में आ गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
फिल्म की रिलीज के बाद सनी की हर जगह वाहवाही हो रही है। इंडिया से लेकर अमेरिका में लोग उनके अभिनय की तारीफ कर रहे हैं। उनकी फिल्म को कई नामी अवॉर्ड शो में नॉमिनेट भी किया गया है और कई अवॉर्ड भी जीते ।
विज्ञापन
सनी अपनी सफलता के सारा श्रेय अपने पिता को देते हैं। उनके पिता ने ही उन्हें फिल्म में काम करने के लिए प्रेरित किया और उनके साथ शूटिंग के वक्त मौजूद रहे।
कमेंट
कमेंट X