भारत में सरकारी नौकरियों को लेकर अलग ही क्रेज है। हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी ही चाहिए, चाहे वो छोटी हो या बड़ी। ये तो आपने कई लोगों से सुना ही होगा 'बस सरकारी नौकरी मिल जाए, उसके बाद लाइफ सेट है। किसी भी सरकारी नौकरी के लिए लाखों आवेदन किए जाते हैं। आवेदन भी इस तरह कि जानकर आप चौंक जाए। हम आपको ऐसे अजीबोगरीब आवेदनों के बारे में बता रहे हैं, जब उम्मीदवारों ने सरकारी नौकरी के लिए हदें पार कर दी। इससे पता चलता है कि देश में सरकारी नौकरी का लालच कितना ज्यादा है। आगे की स्लाइड्स देखें।
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सरकारी नौकरी का लालच : चपरासी के 368 पदों के लिए 23 लाख आवेदन, ढाई लाख इंजीनियर्स भी शामिल
Fri, 22 Nov 2019 03:10 PM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 22 Nov 2019 03:10 PM IST
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- लोगों की सरकारी नौकरी की चाह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार ने सचिवालय में चपरासी के 368 पदों पर भर्तियां निकाली थी। इन 368 पदों के लिए करीब 23 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किए।
- इससे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि इन उम्मीदवारों में ग्रेजुएटस, पोस्ट ग्रेजुएट और तो और पीएचडी धारक भी शामिल थे। जबकि न्यूनतम योग्यता पांचवीं पास मांगी गई थी।
- 368 पदों पर चपरासी की भर्तियों के लिए 255 पीएचडी धारकों ने आवेदन किए थे। वहीं, करीब ढाई लाख इंजीनियरिंग डिग्री वाले उम्मीदवार थे।
- सरकार ने 12 साल बाद इन पदों पर भर्तियां निकाली थीं। अगर इन सब उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया जाता तो उसमें करीब चार साल का समय लग जाता।
- साल 2017 में पश्चिम बंगाल में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। ग्रुप डी के लिए छह हजार पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं। इन भर्तियों में चपरासी के लिए भी आवेदन मांगे गए थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन भर्तियों के लिए करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किए थे।
- आवेदकों में बड़ी संख्या में पीएचडी धारक, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट उम्मीदवार शामिल थे।
- मुंबई पुलिस ने पिछले साल कॉन्स्टेबल के पदों पर 1,137 भर्तियां निकाली थी। इन भर्तियों के लिए दो लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किए। आवेदनकर्ताओं में डॉक्टर, इंजीनियर और वकील भी शामिल थे।
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- हाल में हुई एक नियुक्ति प्रक्रिया में सात डॉक्टरों और करीब 450 इंजीनियरों ने चपरासी की नौकरी ज्वॉइन कर ली। कारण पूछे जाने पर अभ्यर्थियों ने अपने-अपने तर्क भी दिए।
- अब इसे सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं की दीवानगी कहें, या उनके क्षेत्रों में रोजगार की कमी। लेकिन चपरासी सहित वर्ग-4 के पदों पर नौकरी पाने के लिए हजारों की संख्या में डॉक्टरों, इंजीनियरों और स्नातक अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे।
- ये भर्तियां गुजरात उच्च न्यायालय और अधीनस्थ अदालतों में चपरासी सहित वर्ग-4 के कुल 1149 पदों को भरने के लिए निकाली गई थीं। इसके लिए कुल 1,59,278 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 44,958 स्नातक डिग्री धारक रहे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 डॉक्टरों, 450 इंजीनियरों और 543 स्नातकों ने वर्ग-4 की नौकरी स्वीकार की। इन्हें 30 हजार रुपये वेतन मिलेगा।
क्यों है ऐसी हालत
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- गुरुवार को राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले साल एक मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 6.83 लाख पद खाली हैं।
- इन भर्तियों में ग्रुप 'ए' में 19,896, ग्रुप 'बी' में करीब 90 हजार और ग्रुप 'सी' में करीब 5.74 लाख पद खाली हैं।
- कुल 6.83 लाख में से करीब 85 फीसदी नौकरियां ग्रुप 'सी' में ही हैं। यानी बड़े पदों पर नौकरियों की कमी है। ज्यादातर नौकरियां ग्रुप सी और डी में ही निकल रही हैं। यह भी एक कारण है कि उम्मीदवार उच्च शिक्षा, इंजीनियरिंग, एमबीबीएस और वकालत करने के बाद भी पांचवी और आठवीं पास की योग्यता वाली भर्तियों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं। ये नौकरियां ज्वॉइन भी करते हैं।
- जितेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने 1,05,338 खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये भर्तियां 2019-20 में की जा रही हैं।
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