दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया मामले में दोषियों को डेथ वारंट जारी कर दिया है। चारों दोषियों मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को 22 जनवरी सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वो क्यूरेटिव याचिका दायर करेंगे। ऐसे में हम आपको बता दें कि आइए आपको बताते हैं कैसा होता है डेथ वारंट और इस पर क्या लिखा होता है?
क्या होता है डेथ वारंट, इस पर क्या लिखा होता है, यहां है हर जानकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेथ वारंट या ब्लैक वारंट, कोड आफ क्रिमिनल प्रोसीजर- 1973 यानी दंड प्रक्रिया संहिता-1973 (CRPC) के फॉर्म नंबर -42 को कहा जाता है। इसमें उपर ' वारंट ऑफ एक्जेक्यूशन ऑफ अ सेंटेंस ऑफ डेथ' लिखा होता है। किसी दोषी के खिलाफ यह वारंट जारी होने के बाद उसे फांसी दी जाती है।
वारंट के फार्म पर भरने होते हैं ये खाली कॉलम :
- जेल नंबर
- दोषी का नाम
- केस नंबर
- वारंट जारी करने की तिथि
- फांसी की सजा की तारीख, समय और जगह
वारंट पर लिखा होता है कि कैदी को फांसी पर तब लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। कोर्ट द्वारा जारी डेथ वारंट सबसे पहले जेल प्रशासन के पास पहुंचता है। जिसके बाद जेल प्रशासन फांसी की प्रक्रिया शुरू कर देता है। प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल प्रशासन कैदी की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा कराता है।
16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया गया था। जिसके बाद पूरे देश में दोषियों के लिए फांसी की सजा कि मांग को लेकर एक माहौल बना हुआ था। पिछले महीने 13 दिसंबर 2019 को मामले में सुनवाई थी, इस सुनवाई पर अटकलें लगाई जा रही थी कि दिल्ली का पटियाला हाउस कोर्ट दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोर्ट ने सुनवाई 18 दिसंबर तक के लिए टाल दी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को 17 दिसंबर को एक दोषी अक्षय ठाकुर की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करनी थी। जिसके बाद मंगलवार को निर्भया मामले में दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी कर दिया गया।