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Hindi Compulsory Controversy: पूर्वोत्तर राज्यों में 10वीं कक्षा तक हिंदी अनिवार्य, विरोध में उतरे छात्र संगठन

Wed, 13 Apr 2022 11:29 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 13 Apr 2022 11:29 AM IST
सार

Hindi Compulsory Controversy: पूर्वोत्तर राज्यों में कक्षा 10वीं तक के लिए हिंदी भाषा की अनिवार्यता को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (NESO) ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर इस संबंध में नाराजगी जाहिर की है।

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Imposition of Hindi as a Compulsory Subject in North East up to Class 10 will create Disharmony and Detrimental Says Students Bodies
Hindi Compulsory Controversy - फोटो : social media

पूर्वोत्तर राज्यों में कक्षा 10वीं तक के लिए हिंदी भाषा की अनिवार्यता को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (NESO) ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर इस संबंध में नाराजगी जाहिर की है। साथ ही फैसला वापस लेने की मांग की है। छात्र संगठन का कहना है कि इससे अन्य भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव बढ़ेगा। बता दें कि नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (NESO) पूर्वोत्तर राज्यों के आठ छात्र संगठनों का एक समूह है। 


 

Imposition of Hindi as a Compulsory Subject in North East up to Class 10 will create Disharmony and Detrimental Says Students Bodies
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : सोशल मीडिया

केंद्रीय गृह मंत्री से फैसले को वापस लेने की मांग
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ने मांग की है कि इस अव्यवहारिक फैसले को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही सुझाव देते हुए कहा कि संबंधित राज्यों में स्थानीयता के आधार पर भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं को कक्षा 10वीं तक के लिए अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। जबकि हिंदी को वैकल्पिक और ऐच्छिक विषय के तौर पर रखा जाना चाहिए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि सात अप्रैल, 2022 को नई दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिति की बैठक में कहा था कि सभी पूर्वोत्तर राज्य 10वीं कक्षा तक के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने पर सहमत हो गए हैं। 

 

Imposition of Hindi as a Compulsory Subject in North East up to Class 10 will create Disharmony and Detrimental Says Students Bodies
हिंदी पर सियासत - फोटो : सोशल मीडिया
दावा : हिंदी सिर्फ 40 से 43 फीसदी लोगों की मातृ भाषा
नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ने कहा, यह समझा जाता है कि देश में लगभग 40 से 43 फीसदी लोगों के लिए हिंदी मातृ भाषा है। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि देश में अन्य मूल भाषाओं के वक्ताओं की अधिकता है। वे सभी क्षेत्रीय भाषाएं भी अपने दृष्टिकोण में समृद्ध, संपन्न और जीवंत हैं। इनके कारण ही भारत एक विविध और बहुभाषी राष्ट्र की छवि को साकार करता है।

 
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Imposition of Hindi as a Compulsory Subject in North East up to Class 10 will create Disharmony and Detrimental Says Students Bodies
हिंदी पर विवाद - फोटो : iStock

फैसला क्षेत्रीय भाषाओं के लिए हानिकारक होगा 
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन, मणिपुर छात्र संघ और अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ सहित अन्य संगठनों के समूह ने कहा कि पूर्वोत्तर में प्रत्येक राज्य की अपनी अनूठी और विविध भाषाएं हैं, जो विभिन्न जातीय समूहों द्वारा बोली जाती हैं, जिनमें इंडो-आर्यन से लेकर तिब्बती-बर्मन से लेकर ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार शामिल हैं। इस क्षेत्र में हिंदी को एक अनिवार्य विषय के रूप में लागू करना न केवल क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए हानिकारक होगा, बल्कि उन छात्रों के लिए भी हानिकारक होगा जिनके सिलेबस में एक और अनिवार्य विषय जोड़ दिया जाएगा। 

 

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Imposition of Hindi as a Compulsory Subject in North East up to Class 10 will create Disharmony and Detrimental Says Students Bodies
हिंदी विरोध - फोटो : iStock

पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय भाषाओं के उत्थान पर ध्यान दिया जाए
नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष सैमुअल बी जिरवा और महासचिव सिनम प्रकाश सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया कि इस तरह का कदम एकता को बढ़ावा नहीं देगा, लेकिन आशंका और असामंजस्य पैदा करेगा। एनईएसओ इस नीति के खिलाफ है और इसका विरोध करना जारी रखेगा। नेसो ने कहा कि केंद्र को इसके बजाय, पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय भाषाओं के उत्थान पर ध्यान देना चाहिए, जैसे कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और उनके विकास और प्रगति के लिए और अधिक योजनाओं को सुविधाजनक बनाने के कदम उठाने चाहिए।
 

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