विवादित धर्मगुरु नित्यानंद दुष्कर्म मामले में भगोड़ा घोषित है। कानूनी कार्रवाई और सजा से बचने के लिए उसने अब दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के पास एक द्वीप खरीद लिया है और वहां नया देश 'कैलासा' बसाया है। नित्यानंद का विवादों से पुराना नाता है। सोशल मीडिया पर भी नित्यानंद के वीडियो काफी देखे जाते हैं। एक वीडियों में नित्यानंद ने दावा किया था कि वो किसी भी जानवर से संस्कृत और तमिल में बात कर सकता है और उसने सूरज को 40 मिनट तक रोक कर रखा था।
आप कैसे खरीद सकते हैं अपना द्वीप, जानें कीमत, किन बातों का रखें ध्यान
कितने में मिलेगा एक द्वीप?
किसी द्वीप को खरीदने की प्रक्रिया किसी अन्य प्रकार की भूमि खरीदने जैसी ही होती है। पर इसमें आपको और कई चीजों पर ध्यान रखने की जरूरत होती है। जैसे मुख्य भूमि से द्वीप की दूरी और अन्य बुनियादी सुविधाएं।
द्वीप खरीदने के लिए आपको करोड़पति होने की जरूरत नहीं है। ये कीमत कई शहरों में सामान्य स्तर का घर खरीदने से भी कम हो सकती है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार जो लोग छुट्टियों और शांति के लिए द्वीप खरीदना चाहते हैं, उनके लिए इसके कीमत एक लाख डॉलर या 70 लाख रुपये के आसपास भी हो सकती है।
इन चीजों का रखें ध्यान?
सबसे पहले तो आप ये सोच लें कि आपको द्वीप किस प्रयोजन के लिए खरीदना है। आपको अपने परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने के लिए द्वीप खरीदना है या आप द्वीप पर कोई व्यवसायिक गतिविधि करना चाहते हैं।
क्षेत्रफल : अगर आप निजी उद्देश्य से द्वीप खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको ज्यादा क्षेत्रफल का द्वीप खरीदने की जरूरत नहीं होगी। पर अगर आप किसी व्यावसायिक उद्देश्य से द्वीप खरीदने का विचार कर रहे हैं तो आपको ज्यादा क्षेत्रफल की जरूरत होगी। इसके लिए आपका बजट भी ज्यादा चाहिए।
स्थान
चाहे आप निजी उपयोग के लिए द्वीप खरीदें या व्यावसायिक उपयोग के लिए। ये किस स्थान पर स्थित है, यह सबसे महत्वपूर्ण घटक होता है। आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि जिस जगह पर आपका द्वीप है वहां का मौसम कैसा है, मुख्य भूमि से द्वीप कितनी दूरी पर है, आपातकाल स्थिति से निपटने के क्या इंतजाम हैं?
स्थानीय लोग
अगर आप व्यावसायिक उद्देश्य से द्वीप खरीदने जा रहे हैं तो आपको जांच कर लेना चाहिए कि वहां के स्थानीय नागरिकों को इससे कोई परेशानी नहीं हो। वरना कई बार ऐसा देखा गया है कि कंपनी मोटी रकम देकर जमीन खरीद लेती है। जिसके बाद स्थानीय लोगों के आंदोलन और विरोध के चलते उन्हें लौटना पड़ता है।
दूसरा ये कि स्थानीय लोग आपके काम के हों। यानी वो आपके व्यवसाय के लिए उपयोगी हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपको काम के लिए बाहर से लोग लाने पड़ेंगे और इससे आपका खर्च बढ़ जाएगा।
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