एनईपी 2020 इंप्लीमेंटेशन: पूर्वोत्तर राज्यों ने रखा विशेष वित्तीय पैकेज का प्रस्ताव, चुनौतियां दूर करने पर जोर
पूर्वोत्तर राज्यों ने एनईपी 2020 के इंप्लीमेंटेशन के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है। राज्यों का कहना है कि अतिरिक्त फंडिंग से नीति लागू करने में आ रही चुनौतियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
विस्तार
पूर्वोत्तर राज्यों ने इस क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने में मदद के लिए प्रधानमंत्री के एक खास वित्तीय पैकेज का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि खास तौर पर दी जाने वाली फंडिंग से संस्थानों को इसे लागू करने में आने वाली मुश्किलों को दूर करने और नीति के लक्ष्यों को सार्थक शैक्षिक अवसरों में बदलने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव दो दिन तक चले 'नॉर्थईस्ट एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026' में अपनाई गई सिफारिशों में से एक था। नागालैंड द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय "NEP 2020 का कार्यान्वयन: पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विजन, चुनौतियां और अवसर" था और यह शनिवार को चुमौकेदिमा जिले के नागा यूनाइटेड विलेज में संपन्न हुआ।
नॉर्थ ईस्ट नॉलेज सिस्टम बनाने और सालाना कॉन्क्लेव का प्रस्ताव
कॉन्क्लेव में शामिल राज्यों ने एनईपी 2020 के ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ के तहत पूर्वोत्तर की पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए ‘नॉर्थ ईस्ट नॉलेज सिस्टम’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध स्थानीय विरासत और पारंपरिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ना है।
राज्यों ने ‘नॉर्थईस्ट एजुकेशन कॉन्क्लेव’ को हर साल आयोजित करने और इसे एक स्थायी मंच बनाने का भी सुझाव दिया। इस मंच पर राज्य सरकारें, विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षा संस्थान, विशेषज्ञ, उद्योग और अन्य संबंधित लोग एनईपी 2020 के इंप्लीमेंटेशन की प्रगति पर चर्चा कर सकेंगे और चुनौतियों के समाधान साझा कर सकेंगे। इन सिफारिशों को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सौंपने का प्रस्ताव है।
स्कूली और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने पर जोर
स्कूली शिक्षा के लिए राज्यों ने रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को कम करने और कक्षा में पढ़ाई के असर की निगरानी मजबूत करने का प्रस्ताव रखा। खास तौर पर बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) पर ध्यान देने की बात कही गई। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें मदद देने पर जोर दिया गया, जो जरूरी बुनियादी कौशल सीखे बिना ही अगली कक्षाओं में पहुंच जाते हैं।
राज्यों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा। पाठ्यक्रम और पढ़ाई की सामग्री में स्थानीय परिवेश, पारंपरिक ज्ञान और समुदाय के संसाधनों को शामिल करने पर जोर दिया गया। वहीं, व्यावसायिक शिक्षा में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात कही गई, ताकि छात्रों को इंटर्नशिप, रोजगार और अपना काम शुरू करने के बेहतर अवसर मिल सकें।
स्कूली और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने पर जोर
- स्कूलों में अनावश्यक रिपोर्टिंग का काम कम करने का प्रस्ताव।
- कक्षा में पढ़ाई और छात्रों की सीखने की क्षमता की बेहतर निगरानी पर जोर।
- बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) पर विशेष ध्यान देने की बात।
- ऐसे बच्चों की पहचान करने का प्रस्ताव, जो बुनियादी कौशल सीखे बिना अगली कक्षा में पहुंच जाते हैं।
- स्थानीय जरूरतों के अनुसार बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर।
- पाठ्यक्रम और पढ़ाई की सामग्री में स्थानीय परिवेश और पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने का प्रस्ताव।
- पढ़ाई में समुदाय के संसाधनों और स्थानीय अनुभवों का इस्तेमाल करने पर जोर।
- व्यावसायिक शिक्षा में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात।
- छात्रों को इंटर्नशिप और रोजगार के ज्यादा अवसर देने पर जोर।
- छात्रों को अपना काम शुरू करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पाने के लिए जरूरी कौशल देने का प्रस्ताव।
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