देश की सरकारी नौकरियों में भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) की नौकरी को सबसे अहम एवं प्रतिष्ठित माना जाता है। इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (CSE - Civil Service Examination) के जरिये होता है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल भी होते हैं, लेकिन कुछ की ही मेहनत सफल हो पाती है और वे चयनित हो पाते हैं।
Indian Administrative Service: कैसे बनते हैं आईएएस अधिकारी? जानिए चयन प्रक्रिया, वेतन भत्ते एवं सुविधाएं
How to become an IAS officer: एक IAS officer (आईएएस अधिकारी) ही भारतीय नौकरशाही के सबसे बड़े पद कैबिनेट सचिव तक भी पहुंच सकता है। मंत्रालयों में सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पद आईएएस अधिकारी को ही मिलते हैं।
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IAS officer कैसे बनते हैं?
- IAS (आईएएस) अधिकारी बनने के लिए उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से स्नातक होना जरूरी है।
- इसके बाद उसे संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) पास करनी होती है।
- इस परीक्षा के जरिये भारत सरकार के करीब 24 सेवा विभागों में नियुक्तियां रैंक के आधार पर मिलती हैं।
- इस परीक्षा में शीर्ष रैंक (लगभग शीर्ष 100 रैंक) हासिल करने वाले उम्मीदवार ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अधिकारी पद के योग्य होते हैं।
- चयन के बाद अधिकारियों की तीन महीने की शुरुआती ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ही होती है।
- ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी IAS officer को एक मेडल दिया जाता है।
IAS officer की प्रशिक्षण व्यवस्था
- शुरुआती प्रशिक्षण यानी फाउंडेशन कोर्स - 16 सप्ताह (एलबीएसएनए, मसूरी, उत्तराखंड )
- व्यावसायिक प्रशिक्षण (प्रथम चरण ) - 26 सप्ताह (मसूरी)
- राज्य स्तर पर प्रशिक्षण (जिला प्रशिक्षण) - 52 सप्ताह
- संस्थागत प्रशिक्षण (प्रथम चरण) - 3 सप्ताह
- विभिन्न विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण (जिला प्रशिक्षण) - 45 सप्ताह
- संस्थागत प्रशिक्षण (दूसरा चरण) - 4 सप्ताह
- व्यावसायिक प्रशिक्षण (दूसरा चरण) - 9 सप्ताह
IAS officer की नियुक्ति कहां और कैसे होती है?
- आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति के पहले वर्ष में लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलते रहते हैं। इसके पश्चात उन्हें एक उपखंड (Sub-division) सौंप दिया जाता है।
- शुरुआती तौर पर IAS officer को सब डिवीजनल ऑफिसर (SDO), सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM), चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता है।
- प्रत्येक दो वर्ष कार्य कर लेने के बाद उनका ट्रांसफर एक जिले से दूसरे जिले में किया जाता है। वहीं, अवर सचिव (Under Secretary) के तौर पर प्रशिक्षण के लिए 18 माह के लिए सचिवालय भेजा जाता है।
- IAS officer को इसके बाद जिलाधिकारी या जिलाधीश (District Magistrate), जिला कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर (DC) या डिवीजनल कमिश्नर यानी मंडल या संभागीय आयुक्त के पद पर नियुक्ति मिलती है।
- हालांकि, IAS officer की नियुक्ति किसी स्वायत्त संगठन, सार्वजनिक उपक्रम, वर्ल्ड बैंक, एशियाई डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी की जा सकती है। वहीं, केंद्रीय मंत्री के सचिव के रूप में भी कार्य करते हैं।
IAS officer के ड्रेस कोड, अंगरक्षक
आईएएस अधिकारियों का कोई ड्रेस कोड निर्धारित नहीं होता है। हालांकि, रैंक के अनुसार वे अपने स्तर पर इच्छानुसार, फॉर्मल ड्रेस और कोट पहनते हैं। वहीं, सुरक्षा और पद वरीयता के लिहाज से एक आईएएस अधिकारी के साथ दो या तीन अंगरक्षक और सहायक रहते हैं।
IAS officer के प्रमुख कार्य एवं जिम्मेदारियां
- आईएएस अधिकारी एक डीएम यानी जिलाधिकारी के तौर पर काफी ज्यादा शक्तिशाली होते हैं।
- जिलाधिकारी के रूप में वह जिले के पुलिस विभाग के साथ-साथ जिले के सभी विभागों के प्रशासनिक मुखिया भी होते हैं।
- IAS officer पद एवं दायित्व स्तर पर विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- ये सरकार के प्रतिनिधि के रूप में विभिन्न प्रस्ताव, संधि एवं समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत होते हैं।
- लोक प्रशासन और नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए IAS officer जिम्मेदार होते हैं, यानी सरकार जो नीतियां बनाती है उन्हें लागू करवाने काम एक आईएएस अधिकारी का होता है।
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