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कौन थीं देश की पहली महिला डीजीपी, कहां से की पढ़ाई, पूरा देश देख चुका है इनकी कहानी
Tue, 27 Aug 2019 12:53 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 27 Aug 2019 12:53 PM IST
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कंचन चौधरी भट्टाचार्य
- फोटो : फेसबुक
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कंचन चौधरी भट्टाचार्य का निधन हो गया है। बता दें कि ये किरण बेदी के बाद देश की दूसरी महिला आईपीएस अधिकारी थीं। साल 2014 में जब वे हरिद्वार से आम आदमी पार्टी से जुड़ीं तो उनका कहना था कि देश में फैले भ्रष्टाचार, नेताओं के घोटाले और आम आदमी की पीड़ा को देखते हुए राजनीति में आने का फैसला लिया। पुलिस के पास पावर तो है, लेकिन खादी वाले उसे प्रयोग नहीं करने देते। यहा हम आपको इनकी शिक्षा के बारे में बता रहे हैं। पढ़ते हैं आगे...
उत्तराखंड में कंचन चौधरी भट्टाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
इनकी शिक्षा-
उन्होंने राजकीय महिला महाविद्यालय, अमृतसर से पढ़ाई पूरी की। वहीं, पोस्ट-स्नातक स्तर की पढ़ाई अंग्रेजी साहित्य में दिल्ली-यूनिवर्सिटी से की है।
कौन सा सीरियर है इनके जीवन पर आधारित-
इनके जीवन से प्रेरणा लेकर दूरदर्शन पर एक सीरियल ‘उड़ान’ भी प्रसारित हो चुका है।
उन्होंने राजकीय महिला महाविद्यालय, अमृतसर से पढ़ाई पूरी की। वहीं, पोस्ट-स्नातक स्तर की पढ़ाई अंग्रेजी साहित्य में दिल्ली-यूनिवर्सिटी से की है।
कौन सा सीरियर है इनके जीवन पर आधारित-
इनके जीवन से प्रेरणा लेकर दूरदर्शन पर एक सीरियल ‘उड़ान’ भी प्रसारित हो चुका है।
उत्तराखंड में कंचन चौधरी भट्टाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
कंचन चौधरी भट्टाचार्य राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को अपना आदर्श मानती थीं। उन्होंने कहा था कि लीडर का मतलब पालक होता है। उसकी तुलना मां से भी की जाती है। लीडर में निर्णय लेने की तीव्र क्षमता, सर्वत्यागी, निस्वार्थ भावना से प्रेरित, दृढ़ इच्छा शक्ति, सर्वगुण संपन्न का होना चाहिए। ताकि जनता की समस्याओं को उठा सके। लीडर को कभी अहंकार में नहीं रहना चाहिए।
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उत्तराखंड में कंचन चौधरी भट्टाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
यदि पुलिस को उनकी पावर दे दी जाए तो वह और बेहतर काम कर सकती है। इसी व्यवस्था ने मेरे मन को शांत नहीं रहने दिया।इसलिए मैं राजनीति में आई हूं। उनका कहना था कि हरिद्वार से उनका खून का रिश्ता था। उनके नाना मुकंदलाल शाह हरिद्वार निवासी थे। उनके नाना समाजसेवी थे और कई आश्रमों और ट्रस्टों को जमीन दान में दी।
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उत्तराखंड में कंचन चौधरी भट्टाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें मेक्सिको में 2004 में आयोजित इंटरपोल की बैठक में भारत की और से प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित किया गया था। 1997 में प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए उन्हें ‘राष्ट्रपति पदक’ भी मिल चुका है।
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