Depression: आपने ऐसे पेशेवरों को जरूर देखा होगा, जी पहले तो किसी काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन अधिक काम के दबाव और अवसाद के कारण चिंता उनके मन में घर कर जाती है। इसके कारण वह कार्यस्थल पर चुप रहने लगते हैं। साथ ही काम पर अधिक समय तक चुप रहने या चिंता करने के कारण उनके प्रदर्शन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
यदि आप या आपके साथी भी उन्हों पेशेवरों में से एक है, तो इस अवसाद से बाहर निकलने के लिए सबसे पहले अपनी चुप्पी का कारण जानें और तुरंत उस पर काम करें। यहां कुछ रणनीतियों बताई गई हैं, जिन्हें अपनाकर आप इस अवसाद से बाहर आ सकते हैं।
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चुप्पी का कारण
कुछ लोग पहले की तुलना में इसलिए बोलना कम कर देते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि अधिक बोलना व्यर्थ है। ऐसा मुख्यत दो कारणों से होता है। पहला उन्हें नकारात्मक प्रतिक्रिया का डर होता है और दूसरा उन्हें यह विश्वास हो जाता है कि उनके बोलने पर भी कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पेशेवरों की काम में रुचि कम होने लगती है और काम पर ध्यान केंद्रित करना भी उनके लिए मुस्किल हो जाता है।
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खुद का हो समर्थन
यदि आप अपने व्यवहार में यह बदलाव देख रहे हैं, ती सबसे पहले स्वयं का समर्थन करें और अपने किसी खास दोस्त को इसके बारे में बताएं। जब आप इस स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास करेंगे, तो आपको यह समझने में आसानी होगी कि अपने विचारों को पेश करना या बोलना व्यर्थ नहीं है, बल्कि स्वयं का समर्थन करना एक सुरक्षित काम है। इससे आपको प्रबंधकों के सामने एक मजबूत छवि बनाने में मदद मिलती है। जब आप अपने लिए आवाज उठाएंगे, तो इससे आपका तनाव कम होगा और आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
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अपने विचार बताएं
यदि आप कार्यस्थल पर अक्सर चुप रहते हैं, तो आपको आलसी या फारिंग के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है। ऐसे में आपके साथी या प्रबंधक आपको समर्थन देने या आपका सहारा बनने के बजाय आपका आकलन करते हैं। इसलिए कार्यस्थल पर हमेशा चुप न रहें और जहां मुनासिब ही वहां अपने विचारों को जरूर प्रस्तुत करें। इससे प्रबंधक को यह समझने में आसानी होगी कि आप भी काम में रुथि लेते हैं।
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साथियों की मदद भी करें
यदि कार्यस्थल पर आपका महकर्मी भी अवसर चुप रहता है, तो इसके पीछे के कारणों की समझकर उसकी मदद करने की कोशिश करें। साथ ही उसे यह भी बताएं कि चिंता या तनाव से इतर उसके लिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहना क्यों अधिक जरूरी है। जब आप अपने साथी की मदद करेंगे तो, इससे उसे अपनी चिंताओं से उभरने में मदद मिलेगी।
-द कन्वर्मेशन
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