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हरियाणा: पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, दोषी को 10 साल तक जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना; कया है नया कानून का नियम?

Sat, 07 Nov 2026 02:48 PM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम तिवारी Updated Sat, 07 Nov 2026 02:48 PM IST
सार

परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और फर्जीवाड़ा करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। सार्वजनिक परीक्षा कानून में बदलाव के बाद दोषियों को पांच से दस साल तक जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराध में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। परीक्षा कराने वाली एजेंसियां भी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार होंगी। जांच दो महीने में पूरी करनी होगी।
 

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Public Examination Act Amended Paper Leak and Cheating to Attract 10-Year Jail Term Fine Up to Rs 10 Crore
Public Examination Act - फोटो : AI Generated

विस्तार

परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और फर्जीवाड़ा करने वालों पर अब पहले से ज्यादा सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम में बदलाव कर सजा और जुर्माने के प्रावधान बढ़ा दिए हैं। नए नियमों के तहत दोषी पाए जाने पर पांच से दस साल तक जेल हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करता है तो उसे कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है।
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किन कामों को अपराध माना गया है?

  • नए कानून के तहत परीक्षा में कई तरह की गड़बड़ियों को अपराध माना गया है।
  • इनमें प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना और कंप्यूटर नेटवर्क में गड़बड़ी करना शामिल है।
  • परीक्षा में बिना अनुमति किसी उम्मीदवार की मदद करना भी कानून के दायरे में आएगा।
  • इसके अलावा फर्जी वेबसाइट बनाकर प्रवेश पत्र या नियुक्ति पत्र जारी करना भी अपराध माना गया है।
  • परीक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपाना और बिना अनुमति तय परीक्षा केंद्र से बाहर परीक्षा कराना भी दंडनीय होगा।
  • ऐसे मामलों में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हरियाणा में किसे दिए गए निर्देश?

हरियाणा के उच्चतर शिक्षा महानिदेशालय ने नए कानून को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशक एस. नारायणन ने प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों, एनसीसी अधिकारियों और जिला व उपमंडल पुस्तकालयों के लाइब्रेरियनों को पत्र भेजा है। इसमें सभी संबंधित अधिकारियों को कानून के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसका मकसद परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है। अधिकारियों को अपने स्तर पर जरूरी सावधानी बरतने और दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
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किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून?

इस कानून के दायरे में केंद्र सरकार की कई बड़ी भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) की परीक्षाएं आती हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाओं पर भी ये नियम लागू होंगे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से कराई जाने वाली परीक्षाएं भी इसके दायरे में शामिल हैं। यानी इन परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल या दूसरी तरह की गड़बड़ी करने वालों पर नए प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होगी?

नए कानून के तहत परीक्षा कराने वाली एजेंसी या सेवा देने वाली कंपनी भी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार होगी। अगर उसकी लापरवाही या गलत काम सामने आता है तो उस पर पांच करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही उसे आठ साल तक परीक्षा कराने से रोका जा सकता है। अगर एजेंसी के निदेशक या बड़े अधिकारी भी गड़बड़ी में शामिल पाए जाते हैं तो उन्हें पांच से दस साल तक जेल हो सकती है। उन पर पांच करोड़ रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। परीक्षा दोबारा कराने में आने वाला खर्च भी संबंधित एजेंसी से वसूला जाएगा।

जांच और सुनवाई कितने समय में पूरी होगी?

नए नियमों के तहत परीक्षा में गड़बड़ी का मामला दर्ज होने के बाद जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इस मामले की जांच डीएसपी या एसीपी से नीचे के पद का अधिकारी नहीं कर सकेगा। यानी जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार मामले की जांच किसी केंद्रीय जांच एजेंसी या विशेष कार्य बल (STF) को भी सौंप सकती है। इसके अलावा मामले की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। इन समय-सीमाओं का मकसद ऐसे मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई में देरी रोकना है।
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