भारत में सरकारी नौकरी करने वाले को सरकारी दामाद कहते हैं।
भारत में सरकारी नौकरियों को इतनी तरजीह क्यों दी जाती है? बेहद रोचक है ये रिसर्च
सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह
28 बरस के अनीश इस वक्त राजस्थान के भीलवाड़ा में एक हेल्थकेयर कंपनी में मार्केटिंग का काम कर रहे हैं। भीलवाड़ा छोटा सा शहर है। ये कपड़ा उद्योग के लिए मशहूर है।अनीश को इस प्राइवेट नौकरी में 25 हजार रुपए महीने सैलरी मिलती है। अनीश पर काम का बोझ बहुत ज्यादा है। वो बताते हैं कि कई बार तो रात के वक्त उन्हें फोन कॉल्स अटेंड करनी पड़ती है। छोटे शहर से आने वाले अनीश जैसे लाखों भारतीय हैं, जो सरकारी नौकरी पाने के लिए बेकरार हैं।
भारत में सरकारी नौकरी का मतलब है, आमदनी की गारंटी, सिर पर छत और मुफ्त में मेडिकल सुविधाएं। इसके अलावा सरकारी नौकरी करने वाले और उसके परिजनों को घूमने या कहीं आने-जाने के लिए पास भी मिलता है। 2006 में छठें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद भारत में सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह भी निजी सेक्टर की नौकरियों से मुकाबले में आ गई थी। इसके अलावा सरकारी नौकरी की दूसरी सुविधाएं भी हैं। जिस नौकरी के लिए अनीश ने अर्जी दी है, उसमें उन्हें 35 हजार रुपए महीने तक सैलरी मिल सकती है। बाकी सुविधाएं जो मिलेंगी, सो अलग। यही वजह है कि भारत में सरकारी नौकरियां निकलने पर हजारों, कई बार लाखों लोग एक साथ आवेदन कर देते हैं। रेलवे और पुलिस की नौकरी के लिए तो बड़े पैमाने पर लोग अप्लाई करते हैं।
हजार की भर्ती, लाखों आवेदक
अनीश को रेलवे की नौकरी हासिल करने के लिए काबिलियत के साथ-साथ किस्मतवाला भी होना पड़ेगा। एक पद के लिए करीब 200 लोगों ने आवेदन किया है। रेलवे ने करीब 30 बरस के अंतराल के बाद इसी साल एक लाख नौकरियां निकाली थीं। इनमें ट्रैकमैन, कुली और इलेक्ट्रिशियन की नौकरियां हैं। एक लाख नौकरियों के लिए करीब दो करोड़ तीस लाख लोगों ने अर्जी दी। ऐसा नहीं है कि अर्जियों की ये बाढ़ सिर्फ रेलवे की नौकरियों के लिए आती है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई पुलिस में 1,137 सिपाहियों की भर्ती के लिए दो लाख लोगों ने अप्लाई किया था। जबकि सिपाही मुंबई पुलिस का सबसे छोटा पद है। 2015 में यूपी में सचिवालय में क्लर्क के 368 पदों के लिए दो करोड़ तीस लाख आवेदन आए थे। यानी एक पद के लिए 6,250 अर्जियां!
इतने ज्यादा लोगों ने आवेदन दे दिया था कि सरकार को भर्ती को रोकना पड़ा। क्योंकि सभी लोगों के इंटरव्यू लेने में ही चार साल लग जाने थे। बहुत सी ऐसी नौकरियों के लिए खूब पढ़े-लिखे लोग भी अप्लाई करते हैं। इंजीनियरिंग या एमबीए की पढ़ाई करने वाले भी क्लर्क और चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। जबकि ऐसे छोटे पदों के लिए आपका दसवीं पास होना और साइकिल चलाना आना चाहिए, बस। रेलवे ने जो एक लाख नौकरियां निकाली हैं, उनमें न्यूनतम पात्रता दसवीं पास होने की है। आखिर क्या वजह है कि इतने बडे पैमाने पर और ज्यादा पढे-लिखे युवा सरकारी नौकरियों के लिए होड लगाते हैं।
इसकी कई वजहें हैं
जॉब सिक्योरिटी पहली वजह है। सरकारी सुविधाएं दूसरी वजह हैं। और एक बड़ी वजह ये भी है कि सरकारी नौकरी करने वाले को खूब दहेज मिलता है। यानी शादी के बाजार में सरकारी नौकरी करने वाले की ऊंची कीमत लगती है। 2017 में आई बॉलीवुड फिल्म न्यूटन में इस बात को बखूबी दिखाया गया है। इसमें अभिनेता राजकुमार राव सरकारी नौकरी करते हैं, जिससे उन्हें शादी करने में सहूलियत होती है। फिल्म में राजकुमार राव के पिता कहते हैं, 'लड़की का बाप ठेकेदार है और तुम एक सरकारी नौकर। तुम्हारी जिंदगी संवर जाएगी'। फिर उनकी मां कहती है कि, 'लड़की वालों ने दहेज में दस लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल देने को भी कहा है'।
न्यूटन फिल्म ऑस्कर में भारत की आधिकारिक फिल्म थी। भारत में रेलवे की नौकरी को बहुत अहमियत दी जाती है। अगर आप अमरीका में रहते हैं, तो लंबे सफर के लिए सड़क के रास्ते जाने का ख्याल आएगा। लेकिन भारत में लंबे सफर ज्यादातर रेलगाड़ी से तय करते हैं। 2017 में छपे एक लेख के मुताबिक, भारत में रेल के एसी कोच में जितने मुसाफिर चलते हैं, उतने देश की सारी एयरलाइन के कुल मुसाफिर नहीं हैं। उत्तर भारत के गोरखुर, झांसी और मध्य प्रदेश के इटारसी जैसे शहरों की तरक्की की बुनियाद रेलवे रही है।
सामंतवादी समाज का नजरिया
रेलवे भर्ती बोर्ड के अमिताभ खरे कहते हैं, 'भारत का समाज सामंतवादी रहा है। जहां पर सरकारी नौकरी करने वाले को समाज में बड़े सम्मान से देखा जाता था। वो मानसिकता आज भी कायम है'। आईएएस और दूसरी सिविल सर्विसेज को तो और भी ऊंचा दर्जा हासिल है। यूपी और बिहार जैसे राज्यों से हर साल बड़ी तादाद में युवा सिविल सर्विसेज में कामयाबी हासिल करते हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल करीब 15 हजार रेलवे कर्मचारी अपने शहर में वापस ट्रांसफर किए जाने की अर्जी देते हैं। इनमें से ज्यादातर अर्जियां यूपी और बिहार से आती हैं।
इतने ज्यादा सरकारी नौकरीपेशा लोग होने के बावजूद उत्तरी भारत गरीबी और अशिक्षा का शिकार है। सरकारी नौकरी पाने के बाद लोगों के पास अपने शहर या गांव के करीब रहने का मौका मिल जाता है। इसके अलावा बढ़ती आबादी और नौकरी की कमी की वजह से भी हमारे देश में सरकारी नौकरी के लिए बहुत मारा-मारी है।
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